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नोएडा में दिखेगी भारतीय विरासत की झलक: लौट आईं 15 ऐतिहासिक मूर्तियाँ, जानिए इनका इतिहास

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नोएडा में दिखेगी भारतीय विरासत की झलक: लौट आईं 15 ऐतिहासिक मूर्तियाँ, जानिए इनका इतिहास

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत न केवल इसकी पहचान है, बल्कि इसकी आत्मा भी है। सदियों तक विदेशी आक्रमणकारियों, उपनिवेशवादियों और संगठित तस्करों द्वारा लूटी गईं हमारी ऐतिहासिक मूर्तियां और कलाकृतियां अब एक-एक कर देश लौट रही हैं। इसी क्रम में अब नोएडा सेक्टर 62 स्थित भारतीय विरासत संस्थान में आम लोग को इन अद्भुत मूर्तियों के दर्शन होंगे।

कैसे विदेशों तक पहुंचीं ये मूर्तियां?

यूनेस्को के अनुसार, लगभग 50,000 भारतीय कलाकृतियां आज भी विदेशों में मौजूद हैं, या तो म्यूजियम में या निजी संग्रह में। मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक, और फिर तस्करों के हाथों, हजारों मूर्तियां भारत से बाहर चली गईं। भारत सरकार अब इन्हें वापस लाने के प्रयास में जुटी है।

नोएडा में दिखेंगी दो हजार साल पुरानी मूर्तियां

नोएडा के सेक्टर 62 में स्थित भारतीय विरासत संस्थान में अब अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से लौटाई गई 1,500 से 2,000 साल पुरानी मूर्तियां प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें प्राचीन भारतीय इतिहास, महाभारत, सिंधु घाटी सभ्यता और बौद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

पहली बार आमलोगों को मिलेगा दर्शन का अवसर

यह पहली बार है जब इतनी बेशकीमती ऐतिहासिक मूर्तियां आम लोगों के सामने प्रदर्शित की जा रही हैं। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत यह पहल की गई है ताकि देशवासी अपने इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकें।

लौटी हैं 15 अद्वितीय मूर्तियां

संस्थान के कुलपति डॉ. बुद्ध रश्मि मणि के अनुसार, पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014 से अब तक 358 मूर्तियां भारत लौट चुकी हैं, जिनमें से 15 मूर्तियां अब नोएडा में प्रदर्शित हैं। इनमें गौतम बुद्ध की मूर्तियां और अन्य धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व की धातु और पत्थर की मूर्तियां शामिल हैं।

चोरी हुई थी नटराज और मां अन्नपूर्णा की मूर्तियां

1. नटराज की मूर्ति (लंदन से वापसी)

राजस्थान के बाड़ौली स्थित प्राचीन घाटेश्वर मंदिर से 1998 में चोरी हुई 9वीं शताब्दी की नटराज मूर्ति को 2020 में वापस भारत लाया गया। यह मूर्ति प्रतिहार शैली की उत्कृष्ट कृति मानी जाती है।

2. मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा (काशी से चोरी)

काशी से चोरी हुई मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा भी हाल ही में भारत लाई गई, जो पीएम मोदी के प्रयासों की देन है। यह भारत की आध्यात्मिक विरासत का एक अमूल्य हिस्सा है।

297 मूर्तियों की 'घर वापसी'

आजादी के बाद से 2014 तक केवल 13 कलाकृतियां भारत लौटी थीं। लेकिन पीएम मोदी द्वारा विरासत को संरक्षित करने की दिशा में उठाए गए कदमों से अब तक 297 मूर्तियों की वापसी हो चुकी है। 26 जुलाई 2024 को भारत और अमेरिका के बीच हस्ताक्षरित सांस्कृतिक संपत्ति समझौता इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

संस्थान कैसे दे रहा है युवाओं को प्रेरणा

भारतीय विरासत संस्थान केवल मूर्तियों का संग्रहालय नहीं, बल्कि एक प्रेरणा केंद्र है। यह युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ता है और उन्हें सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करता है।

भारत की विरासत को जानना, उसका सम्मान करना, और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना यही असली राष्ट्र सेवा है।