• अनुवाद करें: |
विशेष

आत्मज्ञान एवं आत्म अनुशासन देता है योग - नन्द किशोर शर्मा

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

आत्मज्ञान एवं आत्म अनुशासन देता है योग - नन्द किशोर शर्मा



'योग' शब्द संस्कृत धातु 'युज' से बना है, जिसका अर्थ है 'जोड़ना' या 'एकता स्थापित करना है। योग प्राचीन भारतीय ऋषि मुनियों और तत्ववेत्ताओं द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है।

 

पतंजलि ने (योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः) चित्त की वृत्तियों के निरोध को योग कहा है। योग वशिष्ठ के अनुसार, योग वह युक्ति है,  जिसके द्वारा संसार सागर से पार जाया जा सकता है। गीता में श्री कृष्णा ने एक स्थल पर कहा है, "योग: कर्मसु कौशलम्," अर्थात कर्मों में कुशलता ही योग है।

 

योग के आठ अंग बताए गए हैं नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इस प्रकार योग भारत की प्राचीन आध्यात्मिक और शारीरिक विद्या है जिसका अर्थ है आत्मा का परमात्मा से मिलान या मन, शरीर और स्वास्थ्य का संतुलन यह एक समग्र जीवन शैली है, जो शारीरिक स्वास्थ्य (आसन) श्वास नियंत्रण (प्राणायाम) और मानसिक शांति (ध्यान) के माध्यम से जीवन को बेहतर बनाती है। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है।

 

योग के महत्व व आधुनिक जीवनशैली के प्रतिकूल प्रभाव से स्वयं को मुक्त रखने के उद्देश्य से, 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) प्रत्येक वर्ष 21 जून को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के प्रति जागरूक करना है। योग भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा का अमूल्य उपहार माना जाता है।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को United Nations General Assembly में अपने भाषण के दौरान अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने योग को मानवता के लिए स्वास्थ्य और शांति का मार्ग बताया। योग के महत्व को समझते हुए 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इस प्रस्ताव को 170 से अधिक देशों का समर्थन प्राप्त हुआ, जो एक रिकॉर्ड माना गया। 21 जून उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन (Summer Solstice) होता है। योग परंपरा में इसे आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन ऊर्जा, संतुलन और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया।

 

भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में बड़े स्तर पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित कार्यक्रम में हजारों लोगों ने एक साथ योग किया, जिसने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया। तभी से बड़े उल्लास व उत्साह के साथ हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आयोजित किया जाता है।

 

नियमित योग व प्राणायाम के अभ्यास से व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं स्वस्थ जीवनशैली में आमूलचूल परिवर्तन होता है। शारीरिक स्वास्थ्य योग शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाता है। नियमित योग करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, मोटापा और कई बीमारियों से बचाव होता है तथा रक्त संचार बेहतर होता है।

 

मानसिक स्वास्थ्य : योग तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में मदद करता है। ध्यान और प्राणायाम मन को शांत और एकाग्र बनाते हैं। आध्यात्मिक विकास योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। यह आत्मज्ञान, आत्मअनुशासन और आंतरिक शांति प्रदान करता है। स्वस्थ जीवनशैली का संदेश: योग दिवस लोगों को संतुलित और अनुशासित जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में योग मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाई है।

 

आज अमेरिका, जापान, फ्रांस, रूस सहित अनेक देशों में योग अत्यंत लोकप्रिय हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक उत्सव नहीं बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन का संदेश है। योग मानव जीवन को शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। आज पूरी दुनिया योग को अपनाकर भारत की इस प्राचीन विरासत का सम्मान कर रही है। इसलिए हमें भी योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। 'करें योग, रहें निरोग'

 लेखक - नन्द किशोर शर्मा, पूर्व प्रवक्ता, दिल्ली शिक्षा विभाग