आत्मीयतापूर्ण व्यावहार ही स्वयंसेवक का कर्तव्य – श्री गुरुजी
पड़ोसी से उत्तम व्यवहार, उसके जीवन में भली भाँति समरस होकर, उसका सुख-दुःख समझकर सुख की वृद्धि और दुःख का निवारण करने हेतु, चाहे जो कष्ट करने के लिए नित्य सिद्ध रह कर, सबको अपनाने का प्रयास करना चाहिये। इस विषय में कभी आलस्य न करें, यह ध्यान रखें ।
इसी का दूसरा स्वरूप है कि केवल पड़ोसी ही नहीं, अपितु हम जहाँ भी काम करें, वहाँ जो भी हमारे सम्पर्क में आयें, चाहे हमारे सहपाठी छात्र हों अथवा हम कहीं सेवारत हों तो हमारे समान अन्य छोटे-बड़े जो कर्मचारी हों उनके अथवा उद्योग, व्यवसाय में सम्बन्ध में आने वाले विविध श्रेणी के लोगों के साथ हमारा ऐसा व्यवहार हो कि सबके अन्तः करण में हमारे विषय में श्रद्धा, आदर, आत्मीयता उत्पन्न हो और हम सब अन्तः करण से एकरस हो जायें।
ऐसा ध्यानपूर्वक प्रयास करना चाहिये । विश्वासपात्रता ये सब काम करना 'साधारण स्वयंसेवक' के रूप में हमारा कर्तव्य है।
|| मैं साधारण स्वयंसेवक, मा.स. गोलवलकर, सुरुचि प्रकाशन -जनवरी -2014, पृष्ठ - 10 ||