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कॉटन रस्सी से बुना आत्मनिर्भर भारत का सपना

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मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश

कभी यह हाथ सिर्फ घर का काम करते थे। आज यही हाथ सपनों को आकार दे रहे हैं। मुरादाबाद की यह महिलाएं किसी बड़े शहर की कारोबारी नहीं हैं। लेकिन इनके हौसले किसी बड़ी कंपनी से कम नहीं। मात्र आठ महिलाएं, एक सपना और जिसे नाम दिया  तान्या बिश्नोई स्वयं सहायता समूहकॉटन की रस्सी और मेहनत की गांठें, इनसे बने हैंडबैग आज सिर्फ बैग नहीं, आत्मसम्मान बन चुके हैं। मुरादाबाद से मेरठ, लखनऊ से आगे तक  इन महिलाओं का हुनर अब दूर-दूर तक पहुंच रहा है।

समूह की महिलाएं कहती हैं हम जहां भी स्टॉल लगाते हैं, लोग खुद आकर खरीदते हैं। अब तो ऑनलाइन ऑर्डर भी आने लगे हैं। इस काम से हर महिला कमा रही है महीने के 15 से 20 हजार रुपये। लेकिन सबसे बड़ी कमाई है खुद पर भरोसा। आज यह महिलाएं सिर्फ आत्मनिर्भर नहीं हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए रास्ता भी बना रही हैं। यह कहानी मात्र आमदनी की नहीं है यह कहानी है नारी और सामूहिक शक्ति की और आत्मनिर्भर भारत की।