देहरादून, उत्तराखण्ड
अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन और काम करने का मौका मिल जाए, तो वे न केवल अपना जीवन सुधार सकती हैं बल्कि अपने परिवार की जिम्मेदारी भी संभाल सकती हैं। देहरादून में ऐसा ही एक सराहनीय प्रयास देखने को मिला है, जी हां देहरादून की बस्तियों में रहने वाली महिलाओं की कमजोर आर्थिक स्थिति देखकर समाजसेवी डॉ. स्वामी एस चंद्रा के मन में उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का विचार आया।
उन्होंने इसे केवल एक विचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपना मिशन बना लिया। उनका उद्देश्य था कि महिलाओं के हाथों को काम मिले, वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और बेहतर जीवन जीने का सपना पूरा कर सकें और इस काम की शुरुआत सिलाई प्रशिक्षण से की गई। कई ऐसी महिलाएं, जिन्होंने कभी सिलाई के बारे में सोचा भी नहीं था, प्रशिक्षण लेकर कुशल बन गईं। आज स्थिति यह हैं कि 100 से अधिक महिलाएं अपनी मेहनत से न केवल अपना खर्च चला रही हैं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारी भी उठा रही हैं। वहीं समाजसेवी डॉ. स्वामी एस चंद्रा छुट्टियों के दिनों में बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ाते और अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करते है। समाजसेवी का यह प्रयास कई महिलाओं के जीवन में बदलाव ला चुका है और उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है।



