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विश्व बंधुत्व और कल्याण के मार्ग का सूत्र है हिंदुत्व

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विश्व बंधुत्व और कल्याण के मार्ग का सूत्र है हिंदुत्व 

कहते हैं धर्म से अलग होकर एक स्वस्थ व संस्कारी समाज का निर्माण संभव नहीं है। एक ऐसी ही विचारधारा है हिंदुत्व जो संस्कृति, मानवता, परम्परा के मूल्यों पर केंद्रित है। यह आधुनिक भारत की एक वैचारिक अवधारणा है, जिसका संबंध भारतीय सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान से जोड़ा जाता है। वास्तव में ऐसा कहें तो गलत नहीं होगा कि हिंदुत्व जीवन जीने की एक कला है, अंतरराष्ट्रीय परिपेक्ष्य में विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे हिंदुत्व केवल एक घरेलू राजनीतिक विचारधारा नहीं है बल्कि आज यह सांस्कृतिक, कूटनीतिक, प्रवासी भारतीयों की पहचान और वैश्विक विमर्श का विषय बन चुका है। आज भारतीय आध्यात्मिक ग्रंथों का विश्व स्तर पर अध्ययन हो रहा है। योग, आयुर्वेद, ध्यान और भारतीय दर्शन की वैश्विक लोकप्रियता बढ़ी है। इतिहासकारों का मानना है कि हिंदुत्व का उद्भव 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के रूप में हुआ था लेकिन हिंदुत्व शब्द का सबसे पहला प्रयोग स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा सन 1923 में उनकी पुस्तक Who is a Hindu में स्पष्ट रूप से किया गया। उन्होंने लिखा हिंदुत्व केवल धर्म नहीं, यह सांस्कृतिक चेतना, भौगोलिक राष्ट्रवाद और ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक है। सावरकर के अनुसार हिंदुत्व पुण्यभूमि, पितृभूमि और सांस्कृतिक एकता का आधार है। 

हिंदुत्ववादी विचारधारा शुरूवाती दौर से ही सृजनकारी, अहिंसक धर्मनिरपेक्ष, परिपालक और समावेशी रही है। यह हमें अनुशासित तरीके से सुमार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। आज यह सम्पूर्ण विश्व को ज्ञान, आध्यात्म, योग, विज्ञान और लोकतांत्रिक मूल्यों के संचलन में अभूतपूर्व योगदान दे रही है। आज सारा विश्व हिंदुत्व सभ्यता पर सिर्फ गर्व ही नहीं कर रहा अपितु उसे अपना भी रहा है। हिंदुत्व की सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की अवधारणा वर्तमान में विश्व में चर्चा का विषय है और साथ ही लोगों में इसे अपनाने की प्रवृत्ति भी देखने को मिल रही है। दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्ष्यों ने अपने-अपने मंचों से हिन्दुत्व व हिंदू समुदाय की संस्कृति की सराहना की है और इसे विश्व के लिए कल्याणकारी भी बताया। आज विश्व के अधिकतर देशों में हिंदुत्व रीति रिवाजों को बड़े धूम धाम से मनाया जाता है और साथ ही उस देश के लोग बढ़ चढ़कर इसमें भागीदारी भी लेते हैं। जैसे -

इंडोनेशिया के विशेषकर बाली द्वीप में हिंदू धर्म के अनुसार आज भी प्रमुखता से पूजापाठ, विवाह, और मंदिर संस्कृति की झलक देखने को मिलती हैं।

इसी तरह कंबोडिया के अंगकोर वाट में आज भी ऐतिहासिक रूप से हिंदू सभ्यता का अद्भुत सांस्कृतिक प्रभाव देखने को मिलता है, थाईलैंड की राज परंपराओं में आज भी हिंदू देवी-देवताओं का सम्मान बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। मलेशिया में तमिल हिंदू समुदाय थाइपुसम जैसे त्योहार राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा हैं।

मॉरीशस में महाशिवरात्रि के दिन की लगभग आधी हिंदू आबादी को राष्ट्रीय अवकाश दिया जाता है।

फिजी में आज भी भारतीय मूल की बड़ी आबादी के साथ वहां के लोग बड़ी संख्या में रामायण मंडली परंपरा को निभाते हुए भगवान राम के आदर्शों को खु द में आत्मसात करने की प्रेरणा लेते हैं इसी तरह त्रिनिदाद और टोबैगो में रामलीला और दिवाली राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जाती है।

 कुछ और अन्य देशों में हिंदुत्व परंपरा संस्कृति और त्योहारों को मनाने का प्रचलन है और साथ ही उन देशों में सार्वजनिक अवकाश भी दिया जाना शामिल है।

सूरीनाम में तो कुछ हिंदू त्योहारों को सरकारी मान्यता भी प्राप्त है। संयुक्त राज्य अमेरिका के कई शहरों में दीपावली आधिकारिक रूप से मनाई जाती है।

इसी तरह लंदन और कनाडा जैसे देशों में सार्वजनिक दीपावली उत्सव मनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में कई हिंदू त्योहारों को शामिल कर उन्हें बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

कुछ ऐसे भी देश जैसे जापान, फ्रांस, जर्मनी, ब्राजील जहां हिंदू धर्म बहुसंख्यक नहीं है, लेकिन फिर भी वहां हमारे योग, आयुर्वेद, ध्यान, कर्म सिद्धांत जैसे विचार लोकप्रिय हैं।

हिंदुत्व सदैव से जनकल्याण सहित पृथ्वी पर मौजूद लगभग सभी जीवों- पेड़ पौधों को संरक्षित करना अपना धर्म मानता आ रहा है। अगर हम बात हिंदुत्व के प्रभाव की करें तो पाएंगे आज हिंदुत्व का प्रचारित- प्रसारित योगा पूरी दुनिया में सर्वमान्य है जिसे हर वर्ष 21 जून को सम्पूर्ण संसार में बढ़ चढ़ कर मनाया जाता है। विश्व स्तर पर योग और आध्यात्म में हिंदुत्व संस्कृति का योगदान -

2014 में संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के प्रस्ताव को स्वीकार किया। हमारे योग गुरु स्वामी बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर, सद्गुरु, चिदानंद सरस्वती जैसे आध्यात्मिक गुरु वैश्विक स्तर पर योग और आध्यात्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं जिसका लाभ विश्व के अनेकों लोग ले रहे हैं। आज विदेशों में भारतीय व्यंजन और परिधान के प्रति रुझान बढ़ा है। विश्व का सबसे बड़े सेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व की वकालत इसलिए करता है कि हिंदुत्व ही एक ऐसा धर्म है जो सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।। की बात करता है। संपूर्ण विश्व में जिस तरह से आर्थिक, वैचारिक और सामाजिक उथल पुथल और अनिश्चितता से गुजर रहा है, आज जरूरत है हिंदुत्व जैसी विचारधारा और सोच को सभी धर्माे में विकसित करने की, जिससे सम्पूर्ण समाज और सारे विश्व के लोग एक दूसरे से जुड़े और परस्पर स्नेह करें ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। हिंदुत्व हमें अज्ञानता से ज्ञानता, अधर्म से धर्म, गरीबों को न्याय, सभी को समान अधिकार और सभी जीवों पर दया की भावना को अमल करने की ओर प्रेरित करता है।