सतना, मध्य प्रदेश
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत की आत्मा “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत में निहित है। भारतीय समाज की पहचान उसके उच्च नैतिक मूल्यों, समरसता और मानवता की भावना से होती है, जिसे बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ परिस्थितियाँ बदलती हैं, लेकिन जीवन के मूल मूल्य जैसे सत्य, समरसता, विश्वास और कर्तव्यनिष्ठा कभी नहीं बदलने चाहिए। यदि समाज इन मूल्यों से दूर होता है, तो असंतुलन और असुरक्षा की भावना बढ़ती है।
भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत विश्वगुरु बनने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके लिए समाज को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। उदाहरण देते हुए बताया कि परिवार और समाज में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है – जैसे बच्चों का पालन-पोषण केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज में कई सामाजिक कुरीतियाँ और असमानताएँ देखने को मिलती हैं, जिन्हें समाप्त करने के लिए जागरूकता और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। संविधान और कानून सभी को समान अधिकार देते हैं, लेकिन समाज में समानता और सम्मान का भाव भी उतना ही जरूरी है।
भारत की संस्कृति हमेशा से मानव कल्याण और प्रकृति संरक्षण की पक्षधर रही है। इसलिए हमें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझे और समाज के हित में कार्य करे, तो भारत न केवल एक सशक्त राष्ट्र बनेगा, बल्कि विश्व के लिए मार्गदर्शक भी सिद्ध होगा।



