देहरादून, उत्तर प्रदेश
चारधाम यात्रा अब आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी मजबूत
संदेश दे रही है। जी हां, उत्तराखण्ड सरकार की पहल और श्रद्धालुओं की भागीदारी से
धामों में प्लास्टिक कचरा कम करने की दिशा में सराहनीय परिणाम सामने आए हैं।
डिजिटल डिपाजिट रिफंड सिस्टम (DDRS) के माध्यम से श्रद्धालु द्वारा प्रयोग किए
गए प्लास्टिक बोतलें और पैकेजिंग वापस जमा कर रहे हैं, जिससे यात्रा
मार्ग पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ और साफ-सुथरे बने हैं।
बता दें, इस अभियान में केदारनाथ ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है।
पिछले चार वर्षों में केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री से कुल 58,175
किलोग्राम प्लास्टिक कचरा वापस संग्रहित किया गया। इसमें अकेले केदारनाथ से 49,532
किलोग्राम यानी करीब 85 प्रतिशत प्लास्टिक लौटाया गया। वहीं गंगोत्री से 4,300
किलोग्राम और बदरीनाथ से 4,343 किलोग्राम प्लास्टिक एकत्र किया गया।
पहले केदारनाथ के 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर बड़ी
मात्रा में प्लास्टिक की बोतलें और खाद्य पैकेजिंग फेंकी जाती थी, जिससे
पर्यावरण पर दबाव बढ़ता था। इसे रोकने के लिए अप्रैल 2022 में केदारनाथ
में डिजिटल डिपाजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया। इसकी सफलता के बाद 2023
में गंगोत्री और 2024 में बदरीनाथ में भी यह व्यवस्था शुरू की गई।
इस व्यवस्था के तहत प्लास्टिक बोतल या पैकेजिंग खरीदते समय उस पर
क्यूआर कोड के जरिए 10 रुपये सुरक्षा राशि जमा ली जाती है। उपयोग के बाद पैकेजिंग वापस
करने पर यह राशि लौटा दी जाती है। एकत्रित प्लास्टिक को अधिकृत एजेंसियों के
माध्यम से रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है।
अब तक 14.59 लाख क्यूआर कोड वाली पैकेजिंग पर डिपाजिट लिया जा चुका है, जिनमें से 10.57 लाख पैकेजिंग वापस लौटाई गई हैं। चार वर्षों में 75.10 लाख रुपये से अधिक की डिपाजिट राशि एकत्र हुई है। इस मॉडल की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार अब इसे मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार और ऋषिकेश सहित पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी कर रही है।



