• अनुवाद करें: |
इतिहास

सत्ता से नहीं समाज से होता है परिवर्तन - डॉ. मोहन भागवत जी

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

संघ संस्मरण 

कुछ लोगों की विचारधारा सत्ता केन्द्रित है। वे कहते हैं हम दुनिया को बदल देंगे और अधिक अच्छी बना देंगे। हम यह मान कर चलें कि वे प्रामाणिक हैं; लेकिन यदि उन्हें ऐसा करना है तो उनकी जो एक निश्चित पद्धति है उसके द्वारा यह कैसे संभव है? समाज की सारी सत्ता हमारे हाथ में सौंपो तो हम यह करके दिखा देंगे, ऐसी उनकी भूमिका होती है। संघ का चिंतन बिलकुल इसके विपरीत है।

हम कहते हैं कि समाज हमारा सत्ताधीश है। समाज की सारी सत्ता हमारे हाथ में नहीं चाहिए। हम समाज को योग्य बनायेंगे फिर समाज ही निश्चित करेगा कि उसे क्या और कैसे करना है? समाज योग्य बने इसके लिए हम शाखा में व्यक्ति निर्माण का कार्य करते हैं। ऐसा संस्कारित स्वयंसेवक समाज में जो विभिन्न कार्यकलाप चलते हैं वहाँ जाकर परिवर्तन और परिष्कार का कार्य करता है। यह उसकी हार्दिक प्रेरणा है। इसके पीछे संघ की कोई योजना नहीं है। संघ, यह नैसर्गिक विकास का एक उत्तम नमूना है, शायद यह विश्व का एकमात्र ऐसा नमूना है।

|| समन्वय संकल्पना, मोहनराव भागवत, अनुवादक - ओंकार भावे, सुरुचि प्रकाशन-2009, पृष्ठ-5-6 ||