शुरू हुआ 'मेरा तालाब मेरी जिम्मेदारी अभियान'
तालाबों को साफ, सुरक्षित और उपयोगी बनाए रखने के लिए फतेहाबाद जिले में ‘मेरा तालाब मेरी जिम्मेदारी’ अभियान शुरू किया गया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा देना और तालाबों को प्लास्टिक और गंदे पानी से मुक्त करना है।
जानकारी के अनुसार, फतेहाबाद
जिले में ग्रामीण इलाकों के तालाबों को बचाने और साफ रखने के लिए ‘मेरा तालाब मेरी जिम्मेदारी’ अभियान शुरू किया गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी के
निर्देश पर सभी पंचायत सचिवों को अपनी तैनाती वाली किसी एक ग्राम पंचायत में एक
तालाब चुनने के लिए कहा गया है। इस तालाब को प्लास्टिक मुक्त बनाकर और ग्रे वाटर और
ब्लैक वाटर के सही प्रबंधन के साथ मॉडल तालाब के रूप में विकसित किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि गांवों
के तालाब केवल पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि ये भूजल बढ़ाने, सिंचाई में मदद करने, जैव विविधता बचाने और सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा भी हैं। लेकिन आजकल
प्लास्टिक कचरा और घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे तालाबों में पहुंचने से
उनका पानी प्रदूषित हो रहा है। इससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा
असर पड़ रहा है।
प्रशासन के अनुसार शादी, त्योहार और मेलों के बाद तालाबों में प्लास्टिक कचरा
फेंकना या उसका वहां पहुंच जाना बड़ी समस्या बन गया है। इसके अलावा घरों से निकलने
वाला स्नान, रसोई और कपड़े धोने का पानी बिना किसी उपचार के
तालाबों में चला जाता है। कई जगहों पर गंदे पानी को रोकने वाली जाली, प्लास्टिक ट्रैप, फिल्टर चैंबर और सोख्ता गड्ढे
या तो नहीं हैं या ठीक तरह से काम नहीं कर रहे हैं।
अभियान के तहत चुने गए तालाबों
का पूरा निरीक्षण किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि कितने घरों का गंदा पानी तालाब में
पहुंच रहा है और कितनी नालियों से पानी उसमें जा रहा है। साथ ही वहां बने सोख पिट, लीच पिट, सिल्ट कैचर और फिल्टर चैंबर
जैसी व्यवस्थाओं की भी जांच होगी। तालाब की मौजूदा स्थिति के फोटो और वीडियो भी
तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा तालाब के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए बीओडी और
सीओडी टेस्ट भी कराया जाएगा।
साथ ही पंचायत सचिवों को
निर्देश दिए गए हैं कि वह ग्राम पंचायत स्तर पर बैठक कर लोगों को इस अभियान की
जानकारी दें और तय समय में चयनित तालाब को मॉडल तालाब के रूप में विकसित करें।
सहायक विकास अधिकारी नरेंद्र पाल सिंह ने सभी सचिवों से कहा है कि वह दो दिन के
अंदर हर ग्राम पंचायत से एक तालाब का चयन करें। यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में
तालाबों को स्वच्छ, सुरक्षित और लंबे समय तक उपयोगी
जल स्रोत के रूप में बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



