गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज न केवल अपने
परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में आत्मनिर्भरता की मिसाल भी बन रही हैं। ऐसा
ही कुछ देखने को मिला है मुरादनगर ब्लॉक के मनौली छज्जूपुर गांव में जहां “गौरी स्वयं
सहायता समूह” की महिलाएं खेती
के माध्यम से मिसाल पेश कर रही हैं। समूह की संचालिका प्रीति सैनी बताती हैं कि
उनके समूह में 10 महिलाएं हैं, जो मिलकर करीब 30 बीघा जमीन पर खेती कर रही हैं। इसमें अपनी
जमीन के साथ-साथ किराए की जमीन भी शामिल है।
इन महिलाओं को कृषि विभाग से नई तकनीकों की जानकारी मिलती
है, जिससे उनकी फसल
की पैदावार बढ़ी है। उन्होंने सहफसली खेती अपनाई है, यानी एक साथ कई फसलें उगाना। जैसे गन्ने के साथ
उड़द और मूंग की खेती की जा रही है। इससे लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा। अब इस मेहनत
का असर स्पष्ट दिख रहा है। पहले जहां आर्थिक तंगी थी, वहीं अब यह
महिलाएं सालाना 12 से 15 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें खेती की सही
जानकारी और पैसे की कमी थी,
लेकिन अब उन्हें
बीज, खाद और दवाइयों
की पूरी जानकारी मिलती है।
सबसे बड़ी बात यह है कि अब इन महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ गया है। वे बिना झिझक अधिकारियों से बात करती हैं और अपने निर्णय स्वयं लेती हैं। आज यह महिलाएं गेहूं, गन्ना, उड़द, मूंग और कई तरह की सब्जियों की खेती कर रही हैं और अपने परिवार के लिए मजबूत सहारा बन चुकी हैं।



