संघ कार्य :
संगठित समाज का जागरण - श्री गुरुजी
हमारा काम क्या
है? यह जो विशृंखलित समाज है, आत्मविस्मृति के ही कारण
बिखरा है, उसकी विस्मृति को दूर करना। मेरी मातृभूमि, अखिल समाज मेरा, यह मेरा राष्ट्र; इस मेरी भूमि में मेरे इस
राष्ट्र का जीवन सर्वसमर्थ, सर्व वैभव-सम्पन्न, सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न,
स्वाभिमानी बन कर संसार
में आत्मविश्वास से खड़ा रहेगा,
ऐसी अनुभूति प्रत्येक के
अन्तःकरण में उत्पन्न करना। इस जागृति और
हमारे नित्य के व्यवहार के बल पर समग्र समाज को आत्मविश्वास के सूत्र में गूँथना।
सबको अनुशासन का अभ्यास करा कर आसेतु-हिमाचल, सब संकटों पर विजय पाने
योग्य संगठित राष्ट्रशक्ति के रूप में अपने समाज को खड़ा करना है। अन्य कोई मार्ग
नहीं है। अन्य सभी मार्ग लचर, बातूनी और ऊपरी हैं । हमारे समाज-शरीर में घुसी
हुई मलिनता को हटा कर शरीर को पूर्णतया शुद्ध कर उसका समग्र चैतन्य और सारी शक्ति
पुनः एक बार जाग्रत करने का कार्य ही अपने संघ का कार्य है।
|| मैं साधारण स्वयंसेवक, मा.स. गोलवलकर, सुरुचि प्रकाशन -जनवरी -2014, पृष्ठ - 16 ||