देहरादून, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड के देहरादून जिले के कालसी में, जगतग्राम बाढ़वाला स्थित अश्वमेध यज्ञ स्थल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने दोबारा खुदाई शुरू की है। यह वही स्थल है जहां तीसरी शताब्दी ईस्वी में कुणिंद वंश के शासक राजा शीलबर्मन ने अश्वमेध यज्ञ कराया था। इतिहासकारों के अनुसार यहां चार यज्ञ वेदिकाएं थीं। तीन वेदिकाएं पहले ही मिल चुकी है। अब खोज है चौथी वेदिका की। 73 वर्षों बाद शुरू हुई ट्रायल खुदाई में मिले हैं। मिट्टी के बर्तन, जले हुए कोयले और ईंटों के अवशेष, जो बताते हैं कि यह भूमि केवल पूजा की नहीं, एक समृद्ध वैदिक सभ्यता की साक्षी रही है। मिट्टी में मिले अवशेषों की वैज्ञानिक जांच की जा रही है। जिससे पता चलेगा
-यज्ञ स्थल का वास्तविक काल
-उस समय की मानव गतिविधि
-और सनातन संस्कृति का ऐतिहासिक स्वरूप
इससे पहले 1952 से 1954 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने यहां खुदाई की थी, जिसमें तीन वेदिकाओं के प्रमाण मिले थे। फिलहाल यह ट्रायल खुदाई है। टीम दो से तीन मीटर नीचे तक पहुँच चुकी है और आगे खुदाई जारी है। यह खोज सिर्फ अतीत को नहीं बताती, यह भारत की वैदिक और सनातन परम्परा को वैज्ञानिक आधार पर समझने का अवसर है। उत्तराखण्ड की मिट्टी के नीचे छुपा इतिहास। अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है।



