मणिकर्णिका—संगोष्ठी
सांगानेर, 28 नवम्बर।
एस.एस. जैन सुबोध महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सांगानेर एवं संस्कृता महिला विचार मंच के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार को “मणिकर्णिका—संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका तथा भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा से युवा पीढ़ी को परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मंचासीन अतिथियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का आरंभ किया। राष्ट्र सेविका समिति, सांगानेर महानगर की शारीरिक प्रमुख सौम्या पांडेय ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. यदु शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। लक्ष्मी बघेल ने एक प्रेरणादायी एकल गीत प्रस्तुत किया।
संस्कृता महिला विचार मंच की संयोजिका डॉ. शिप्रा पारीक ने संगोष्ठी की प्रस्तावना प्रस्तुत की और नारी के ‘स्वबोध जागरण’ तथा समाज में उसकी मूलभूत भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता, राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वी. शांता कुमारी जी ने “मणिकर्णिका” विषय पर सारगर्भित उद्बोधन दिया। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि नारी में इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति एवं कर्तव्य शक्ति – ये तीनों शक्तियाँ स्वाभाविक रूप से विद्यमान हैं। रानी लक्ष्मीबाई में अनुशासन और मातृत्व का अद्वितीय समन्वय था, जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने शिक्षण, चिकित्सा तथा अध्ययन – सभी क्षेत्रों में निष्ठा और कर्तव्यपरायणता का संदेश दिया।
महाविद्यालय की छात्राओं ने रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसने सभा में उपस्थित प्रत्येक दर्शक को रानी के अदम्य साहस और बलिदान का सजीव अनुभव कराया।

इस अवसर पर मेधा नरुका जी महिलाओं की आत्मशक्ति, समाज निर्माण में उनकी निर्णायक भूमिका तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध पर चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजना शर्मा और डॉ. दीक्षिता अजवानी ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर ग्रेटर की पूर्व महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने की। उन्होंने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्र की नींव तैयार करते हैं। उन्होंने छात्राओं को चरित्र निर्माण और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने के संकल्प के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में सांगानेर विभाग की कार्यवाहिका गीतांजलि पारीक ने सभी अतिथियों, वक्ताओं तथा आयोजकों का आभार व्यक्त किया। गोष्टी का समापन “वंदे मातरम्” गायन के साथ हुआ।



