चम्पावत, उत्तराखण्ड
‘जय
भगवती मां स्वयं सहायता समूह’ की
पांच महिलाएं मिलकर इस कैफे का संचालन कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद
इन्होंने अपने संकल्प, मेहनत
और नए विचारों से एक नई दिशा बनाई है। यहां पिरूल से बनी टोकरियां, आंवला कैंडी, घर के बने अचार, जूट बैग और मंडुवे के पौष्टिक बिस्किट
जैसे कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जो अब गांव से बाहर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
हिलांस कैफे में आने वाले लोगों को केवल स्वादिष्ट भोजन ही नहीं, बल्कि गांव का सच्चा आतिथ्य भी मिलता है। यहां परोसे जाने वाले हर व्यंजन में परंपरा और अपनापन झलकता है। यह कैफे न केवल संस्कृति को सहेज रहा है, बल्कि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग भी दिखा रहा है। आज यह प्रयास आर्थिक रूप से भी सफल हो चुका है। यह समूह हर महीने लगभग 25 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहा है, जिससे इन महिलाओं के परिवार मजबूत हो रहे हैं और उनके बच्चों का भविष्य भी बेहतर बन रहा है। अब ये महिलाएं अपने परिवार की जरूरतों को आत्मनिर्भर होकर पूरा कर रही हैं।
जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर दिए गए प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने भी इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है, जिससे महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं। मेहनत, एकता और सही मार्गदर्शन से कोई भी सपना हकीकत बन सकता है, और जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो पूरा समाज आगे बढ़ता है।



