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वर्षों के संघर्ष के बाद भी भारतीय परिवार व्यवस्था के कारण ही हमारी संस्कृति सुरक्षित है – रविंद्र जोशी जी

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 काशी, उत्तर प्रदेश 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कुटुंब प्रबोधन संयोजक रविंद्र जोशी जी ने मुमुक्षु भवन के सभागार में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र कुटुंब प्रबोधन के रामलला गट की बैठक के उद्घाटन सत्र में कहा कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है। विभिन्न साहित्य में रचनाकारों ने इसके महत्व को वर्णित किया है । अतः व्यक्ति को मनुष्य जन्म की महानता को समझ कर उसका एक क्षण भी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों के संघर्ष के बाद भी भारतीय संस्कृति भारत की परिवार व्यवस्था के कारण सुरक्षित है। समाज एवं राष्ट्र के प्रति श्रद्धा और दायित्व का भाव भी सर्वप्रथम परिवार रूपी पाठशाला में सिखाया जाता है।

वर्तमान परिवार व्यवस्था की चर्चा करते हुए रविंद्र जोशी ने कहा कि घर में शारीरिक श्रम को कम करने वाली 100 वस्तुएं हैं, परंतु घर का वातावरण भक्तिमय कैसे हो यह हम सब की जिम्मेदारी है। विगत कुछ वर्षों में भारतीय कुटुंब व्यवस्था को नष्ट करने हेतु कई षड्यंत्र चल रहे हैं। लड़का एवं लड़की की आपसी सहमति से बिना विवाह के एक साथ रहने का निर्णय, यह भारत की पारिवारिक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करता है।

उन्होंने कहा कि कुटुंब व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के लिए आठ गुणों को आवश्यक बताया। बल, शील, ओज, धैर्य, युक्ति, बुद्धि, दृष्टि एवं दक्षता, यह आठ गुण हैं। भय, स्वार्थ, अहंकार, आलस्य, गलत सामाजिक मान्यताएं एवं बौद्धिक जड़ता, इन 6 दुर्गुणों को परिवार से दूर रखना आवश्यक है।

इस धरती पर 99% लोग विवाह करके ही सुखी होंगे। यद्यपि इसके लिए सहनशीलता, समझदारी और तालमेल का गुण आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में जिन पांच परिवर्तनों की चर्चा हो रही है, उनमें से शेष चार परिवर्तन बिना कुटुंब प्रबोधन के पूर्ण नहीं किया जा सकते।

अध्यक्षता कर रहे कैलाश मठ के महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि 1200 वर्ष पूर्व केरल के कलाड़ी गांव में जन्म लेने वाला बालक ओंकारेश्वर आकर अपने गुरु से शिक्षा ग्रहण करता है एवं उसके बाद वह काशी में माता अन्नपूर्णा के सामने नतमस्तक होता है। यह घटना संपूर्ण भारत को एक परिवार के रूप में प्रतिबिंबित करती है। स्वामी जी ने बताया कि भारत में वर्ण व्यवस्था वास्तव में सामाजिक कार्य का वर्गीकरण है।

उन्होंने कहा कि वास्तव में सभी मनुष्यों को पूजा शिवजी की करनी है, भक्ति नारायण की करनी है और सेवा समाज की करनी है। संत कबीर जी का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर सभी के हृदय में निवास करता है, बस उसे पहचानने की आवश्यकता है। प्राचीन भारतीय समाज कर्म को महत्व देता था।

काशी प्रांत संघचालक अंगराज जी, अखिल भारतीय सह संयोजक मनसुख भाई सेठिया भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की।