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जो देश का नहीं वो किसी काम का नहीं

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जो देश का नहीं वो किसी काम का नहीं

सनातन हिन्दू संस्कृति का विरोध कर रहे समस्त धर्म द्रोहियों का अब भारत भूमि में भविष्य नहीं है। ऐसे धर्म द्रोही कितना भी प्रलाप कर लें उनके अन्त का समय निकट आ गया है। ऐसे गुटों सम्प्रदायों और राजनीतिक वैमनस्य में बार बार सिर उठाने वालों के लिए वर्तमान समय गम्भीर चेतावनी का है। वह या तो अपने आपमें बदलाव कर लें या फिर सन्निकट भविष्य में समूल नाश का सामना करने को तैयार रहें।

श्रीरामानुजाचार्य सम्प्रदाय के जगतगुरु ओम प्रपन्नाचार्य ने यह बातें नागरिक टाइम्स से एक साक्षात्कार में कहीं। उनका मानना है कि भारत का युवा जाग उठा है। भारत भूमि धर्म क्षेत्र है। धर्म की संज्ञा केवल एक है। जिसे सनातन हिन्दू संस्कृति कहा गया है। यही एकमात्र धर्म है। इसके प्रति डेढ़ हजार वर्षों की अवधि में जितना द्रोह हुआ उसके हिसाब का समय आ गया है।

एक प्रश्न के उत्तर में जगतगुरु ने कहा कि इस सत्य को कोई अस्वीकार नहीं कर सकता कि हिन्दू धर्म की सन्त परम्परा के अनेक उच्च आसन हथियाने वाले कुछ लोग निकृष्ट आचरण, घटिया सोच और दुर्मति से ग्रस्त हैं। ऐसे लोग चाहे जितने महत्वपूर्ण पद पर आसीन हों यदि हिन्दू समाज को बाँट कर देखते हैं- समता, समरसता और समभाव के पक्षधर नहीं हैं तो वह घनघोर धर्मद्रोही हैं। ऐसे लोग वैभव बटोरकर बड़े पद तक पहुंचने में भले सफल हो गये पर समाज से कट चुके हैं। स्वयंभू महात्मा कहलाने वालों को अब मुंह की खानी पड़ेगी। जिन लोगों का आचरण अशुद्ध है, जो लोग मनसा, वाचा, कर्मणा सनातन संस्कृति और समाज के प्रति पाप करने वाले निपट धर्मद्रोही हैं। वह शत्रुओं से अधिक घातक हैं। प्रायः प्रलाप करके समाज को तोड़ने में लगे रहते हैं। कुछ तो राजनीतिक विद्वेष फैलाने वालों के अनुगामी हैं। उनके कहने पर ही हिन्दू समाज विरोधी क्रिया कलाप करते हैं। इनके पाप हिन्दुओं को संताप देते हैं।

जगतगुरु ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने स्वयं अपने आपको सनातन हिन्दू संस्कृति से विलग कर लिया है। कांग्रेस भारत में मुस्लिम लीग का पर्याय बनी हुई है। इस पार्टी का स्वामित्व सोनिया के पास है। जिसके नेताओं में वह स्वयं और उनका बेटा तथा बेटी है। बहुत समय से इस पार्टी की नेता सोनिया इसे मुसलमानों और ईसाईयों की पार्टी बनाने को उतावली थीं। जिन्होंने कांग्रेस को इतना नीचे गिराया कि अब कोई कितने भी दाँव पेंच अपनाये कांग्रेस को हिन्दू समाज नहीं अपनाएगा। यह देश की मुख्य राजनीतिक धारा से स्वतः हट रही है। इसे देश की एकात्मता से कौई लगाव नहीं है।

जगतगुरु से जब पूछा कि सनातन संस्कृति को मानने वाले हिन्दू हैं तो फिर बहुत से हिन्दू नेता उल्टे बयान क्यों देते हैं। प्रपन्नाचार्य ने कहा कि देश के कुछ राजनीतिक दल अपना ध्यान कुछ जातीय वर्गों तक सीमित रखते हैं। यह दल जातीय पहचान बनाने में सफल हुए क्योंकि इन्होंने केवल इन्हीं जातीय समूहों को लाभ पहुंचाया। पूरे समाज का ध्यान कभी नहीं किया। इनको वही दल चुनौती दे सकता है जो विभेद रहित व्यवहार करें। नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक सोच के सन्दर्भ में पूछने पर जगतगुरु ने कहा कि यह बदलाव केवल प्रधानमंत्री मोदी के कारण नहीं है। इसकी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा विराट संगठन है। संघ के करोड़ों कार्यकर्ताओं की 100 वर्षों की अखण्ड तपश्चर्या का यह परिणाम है। नरेन्द्र मोदी उसी राष्ट्रीय धारा के नेता हैं।

उनकी सोच में स्वामी रामकृष्ण, स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, चाणक्य, चन्द्रगुप्त, शिवाजी, राणा प्रताप, डाक्टर अम्बेडकर, डॉक्टर हेडगेवार, गुरुजी गोलवरकर, वीर सावरकर की समरसता और सर्वधर्म समभाव का गहर चिन्तन है। इसी चिन्तन से मोदी, गडकरी, योगी जैसे तमाम प्रखर राष्ट्रवादी नेता प्रकट हुए हैं और आगे भी यह क्रम बना रहने वाला है। इसीलिए राष्ट्रवाद की सशक्त धारा प्रवाहमान होती सभी को दिखायी पड़ रही है। उनका कहना है कि कतिपय सामाजिक, राजनीतिक और मजहबी नेता बयान बहादुर बने हुए हैं। उनका सामाजिक आधार टूट चुका है।  हिन्दू धर्म की गहराई और परिव्याप को जाने बिना अपने खोखले बयानों से भ्रम उत्तपन्न करने वाले अब भोर के नक्षत्रों की तरह यत्र तंत्र लटके हुए चमगादड़ भर लगते हैं।

देवबन्द स्थित दारुल उलूम के नेता अरशद मदनी के हाल के बयान पर घोर आपत्ति जताते हुए ओम प्रपन्नाचार्य ने कहा कि वह अपने को इस्लाम का इस युग का नायक मानने लगे हैं। क्योंकि वह इस्लाम के ऐसे केन्द्र के उच्च आसन पर कब्जा जमाये बैठे हैं जिसको संसार के कई देशों में इस्लामी कट्टरपंथियों को तैयार करने का श्रेय दिया जाता है। अरशद मदनी कट्टरपंथ के हुनरमन्द नेता हैं। उनका केन्द्र भारत के मुसलमानों को राष्ट्रप्रेम से दूर करता आया है। पाकिस्तान के गठन में यह केन्द्र सक्रिय रहा। अब फिर से यह केन्द्र तेजी से सक्रिय है। भारत भूमि का अन्न जल खाकर भी राष्ट्रघात कर रहा है। ऐसे केन्द्रों को भारत से विदा करने का समय आने वाला है। जो देश का नहीं किसी काम का नहीं है। इसी पृष्ठ भूमि में उन सभी केन्द्रों, संगठनों को जांचना परखना अनिवार्य है। ऐसे सभी द्रोहियों को सीमा पार धकेलना चाहिए जो देश पर बोझ बनकर घात करते हैं।