बांग्लादेश में हिंसा: ‘बांग्लादेश में हिंदू विरोधी माहौल’
बांग्लादेश सुलग रहा है। स्थिति चिंताजनक रूप से बिगड़ गई है। भारत विरोधी नफरत के नैरेटिव को फैलाया जा रहा है। इन परिस्थितियों में हमें समझना होगा कि क्या हो रहा है, क्यों हो रहा है, और हमें क्या करना चाहिए?
बांग्लादेश में हो रही हिंसा से वहां हमारे हिंदू भाइयों बहिनों को खतरा है, और यहां भारत में भावनाएं भड़क रही हैं। डेढ़ साल पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत भागने के बाद से, इस्लामी कट्टरपंथीयों ने हिंदू घरों, मंदिरों और बिजनेस पर आतंक फैलाया है। कारण - हिंदुओं से नफरत। किंतु 18 दिसम्बर 2025 के बाद हिंदू विरोधी हिंसा, और भारत में इसकी बड़े पैमाने पर प्रचार का मकसद कुछ और ही लगता है - भारत को ओवर रिएक्ट करने के लिए उकसाना; जिसको फिर ”भारत से खतरा“ बताकर, फरवरी 2026 में बांग्लादेश में होने वाले चुनावों को टालने का बहाना बनाना। लेकिन भारत इस छिपे हुए खेल को समझता है।
हाल के अत्याचार: 18 दिसम्बर 2025 के बाद हुए दंगे अचानक नहीं शुरू हुए थे। ये तब शुरू हुए जब 12 दिसम्बर 25 को ढाका में बांग्लादेशी एक्टिविस्ट उस्मान हादी को अनजान हमलावरों ने गोली मार दी थी, उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया; और वहां 18 दिसम्बर 2025 को उनकी मृत्यु हो गई। हादी सदस्य थे हसीना विरोधी ‘इंकलाब मंच’ के, जो शेख हसीना की अवामी लीग को खत्म करना चाहता था।
हादी की मौत के पश्चात कुछ अजीब हुआ। नैरेटिव ही बदल दिया गया। भारत विरोधी नारे लगे। भारतीय दूतावास तक आक्रामक मार्च निकाले गए। लेकिन भीड़ यहीं नहीं रुकी, उन्होंने फ्लाईओवर तोड़ दिए। ‘द डेली स्टार’ और ‘प्रोथोम आलो’ समाचार पत्रों के कार्यालयों में आग लगा दी। 20 दिसम्बर 2025 को हादी के अंतिम संस्कार के बाद अपने संसद पर धावा बोल दिया, अपने ही राज्य में तोड़फोड़ करी।
मकसद था अफरा-तफरी, जिससे तबाही हो। तो, फायदा किसे होगा? किसी भी राजनीतिक दल को नहीं। सिर्फ कट्टर इस्लामी संगठन जमात-ए-इस्लामी, ..और उनके आका को। अफरा-तफरी, डर का माहौल, तबाही, और चुनाव टल जाने से केवल इन्हीं की मदद होती है। इस्लामवादी एकीकरण के लिए लोकतांत्रिक अव्यवस्था की आवश्यकता होती है।
मूल कारण और छिपे हुए हाथ: मुहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन में इस्लामी गुट अफरा-तफरी फैलाते हैं और उसका फायदा उठाते हैं। उस्मान हादी की हत्या जमात-ए-इस्लामी की सोची-समझी उकसावे की कार्रवाई भी हो सकती है, जिसका मकसद अफरा-तफरी फैलाकर सत्ता हथियाना है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव जीतने में अपनी नाकामी को अच्छी तरह जानते हुए, जमात-ए-इस्लामी राज्य को अस्थिर करके, और मौजूदा कमजोर और बेअसर राजनीतिक व्यवस्था का फायदा उठाकर, चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह से बायपास करने की कोशिश कर रही है!
पर्दे के पीछे से, कथित तौर पर अमेरिका, पाकिस्तान और चीन, बांग्लादेश को अस्थिर करने, पाकिस्तानी प्रभाव को बढ़ाने, और भारत को पीछे धकेलने के लिए, और अपने अन्य भू-राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इन गतिविधियों का समर्थन करते हैं।
एक हिंदू को पीट-पीट कर जान से मारना और फिर उसे जलाना, एक सुनियोजित उकसावा हो सकता है। जिस तरह से यह एक अकेला वीडियो भारतीय फोनों पर तुरंत छा गया; हर चैनल पर हावी हो गया। इसके उलट, यह हैरानी की बात है कि वेस्टर्न मीडिया ने इस भयानक घटना की बहुत लंबे समय तक रिपोर्ट भी नहीं किया।
एक बात सोचिए: क्या US के डीप स्टेट ने उस्मान हादी को मार दिया, सिर्फ इसलिए ताकि और ज्यादा अफरा-तफरी मचे, और चुनाव अनिश्चित काल के लिए टल जाए, और US कठपुतली यूनुस ज़्यादा समय तक कुर्सी पर बना रहे? ध्यान दें कि पहले से बिल्कुल अलग, बांग्लादेश में कई पाश्चात्य दूतावासों ने हादी की मौत पर सार्वजनिक और आधिकारिक तौर पर दुख जताते हुए ट्वीट क्यों किया? USA, EU, फ्रांस और जर्मनी ने ऐसे ट्वीट किये। यह असाधारण है। आम तौर पर दूतावासों द्वारा ऐसा दुःख प्रदर्शन और समर्थन राष्ट्राध्यक्षों के लिए किया जाता है, और कभी-कभी उस स्तर के कुछ और लोगों के लिए भी। एक स्टूडेंट लीडर और एक्टिविस्ट के तौर पर, हादी निश्चित रूप से उस स्तर के बिलकुल नहीं थे। और इन दूतावासों ने उस हिंदू आदमी का कोई ज़िक्र तक नहीं किया जिसे पीट कर, जान से मारकर, आग लगा दी गई थी; और न ही भारतीय दूतावास पर हमले के प्रयास का कोई वर्णन किया।
लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव होना, और उसमें आवामी लीग का हिस्सा लेना, न तो USA को, और न ही चीन को पसंद आता है। अगर हिंसा या किसी और बनावटी ‘जरूरत’ जैसे "भारत से खतरा" की वजह से चुनाव टाले जाते हैं, तो USA, चीन और मोहम्मद यूनुस को फायदा होगा।
आगे क्या हुआ? गुस्सा। भारत में कांग्रेस पार्टी ने पार्लियामेंट के अंदर और बाहर बयान दिए। एक हिंदू आदमी के लिए इंसाफ मांगा। एक्शन मांगा, दबाव बनाया, कि भारत प्रतिक्रिया शीघ्र करे, नहीं तो कमजोर प्रतीत होगा ।
शायद सभी भारत विरोधी तत्व भारत से ओवर रिएक्शन चाहते हैं।
भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया: भारत इस षड्यंत्र से और ओवर रिएक्शन से बच कर, इन चालों को दुनिया के सामने ला रहा है। क्योंकि अगर भारत ओवर रिएक्ट करता है... तो कुछ देश बांग्लादेश को यूक्रेन जैसा बनाना चाहेंगे। परिणाम होगा लंबी अवधि के लिए युद्ध का माहौल; पैसा खर्ची, और भारत की बढ़ती प्रगति में रुकावट।
बांग्लादेश में अगले चुनाव 12 फरवरी 2026 को हैं। चुनाव कौन चाहता है? राजनीतिक दल। चुनाव के खिलाफ कौन है? जमात-ए-इस्लामी; आधिकारिक तौर पर यह चुनावों का समर्थन करती है, लेकिन उसे पता है कि वह चुनाव हार जाएगी और इसलिए बांग्लादेश पर उसका "गैर-संवैधानिक" प्रभुत्व समाप्त हो जाएगा। इसलिए जमात भारत को भड़काने की बहुत कोशिश कर रही है। कोई भी भारतीय ओवर रिएक्शन, और यह लोग चुनावों को अनिश्चित काल के लिए टालने का बहाना बना देंगे।
शाहीन बाग और MSP के खिलाफ किसानों का आंदोलन याद है? उनकी रणनीति थी - सरकार और पुलिस को ओवररिएक्ट करने के लिए उकसाना। उनकी रणनीति फेल हो गई थी।
बांग्लादेश में चुनाव होना भारत के हित में है। चुनाव में कौन सा दल हिस्सा नहीं ले सकता? अवामी लीग; क्योंकि इसे कानूनी तौर पर एक राजनीतिक दल के तौर पर डी-रजिस्टर कर दिया गया है। यह एक नया राजनैतिक दल / पहचान बनाएंगे या नहीं, यह पता नहीं है। अवामी लीग पर बैन और राजनैतिक मैदान में इनके नेताओं की गैरमौजूदगी ने देश में राजनीतिक समीकरण बदल दिया है। भारत को इस बात पर जोर देना चाहिए कि अवामी लीग को आने वाले चुनावों में हिस्सा लेने की इजाजत मिलनी चाहिए।
भारत बांग्लादेश के अंदरूनी राजनीतिक झगड़े से अलग रहा है। उसका रवैया संयम, शांतिपूर्ण कूटनीति और संप्रभुता के प्रति सम्मान वाला रहा है। इस भारतीय नीति ने आग को घी से वंचित रखा है, भले ही इसने नई दिल्ली में घरेलू सब्र की परीक्षा ली हो। इसलिए, नवंबर 2025 में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव के मौके पर नई दिल्ली में भारत के NSA अजीत डोभाल जी और बांग्लादेश के NSA डॉ. खलीलुर रहमान के बीच विचार विमर्श प्रासंगिक है।
भारत क्या कर सकता है - बिना ओवररिएक्ट किए?
1. उक्त अंकित सुझाव अपनाएं।
2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तथ्य उजागर करे। बांग्लादेश की अस्थिरता और जमीनी हकीकत को बढ़ा-चढ़ाकर बताने की नहीं; केवल इसे उजागर करने की आवश्यकता है।
3. भारत को बांग्लादेशी संस्थाओं और समझदार नागरिकों से बातचीत, और कट्टरपंथी लोगों को अलग करने का प्रयास जारी रखना चाहिए।
4. भारत सरकार के अतिरिक्त, दुनिया भर के हिंदुओं को धर्म की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए। जमीनी हकीकत और पीड़ितों की स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार करें।
5. बांग्लादेश को भारत से मिलने वाले भिन्न फायदों की समीक्षा। जैसे कि इन क्षेत्रों में- व्यापार, एवियशन, चिकित्सा संबंधी पर्यटन, बिजली पूर्ति, बाढ़ प्रबंधन इत्यादि। याद रहे की गंगा जल संधि का नवीनीकरण पुनः दिसंबर 2026 में होना है।
भारत विरोधी तत्वों का लक्ष्य है कि पाकिस्तान के माध्यम से, बांग्लादेश का ध्यान अर्थव्यवस्था से हटकर सैन्यवाद पर केंद्रित करना। दूसरा, बांग्लादेश को भारत का यूक्रेन बनाना। इन कामों में चीन की भी नकारात्मक भूमिका हो सकती है। हमारे देश के अंदर भी देशद्रोहियों का एक प्रभावशाली मोर्चा है। इस्लामिक जिहादियों का लक्ष्य है कि बांग्लादेश में बंगाली पहचान मिटा कर, इस्लामिक पहचान स्थापित करना; और बांग्लादेश से हिंदुओं का सफाया करना, जैसे अफगानिस्तान से, पाकिस्तान से और कश्मीर से किया। हमें एकजुट होकर इन नापाक इरादों को ध्वस्त करना है।
लेखक गृह मंत्रालय, भारत सरकार में पूर्व सुरक्षा सलाहकार रह चुके है।




