पुणे
भारतीय शिक्षण मंडल (पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत एवं पुणे महानगर) द्वारा आयोजित ‘नवोन्मेष -अध्ययन मंडल सदस्य संवाद’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये जी ने उच्च शिक्षा में भारतीय दृष्टिकोण के समावेश पर बल दिया। एस. पी. महाविद्यालय परिसर स्थित भाऊसाहेब चितळे सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में पुणे और आसपास के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं स्वायत्त महाविद्यालयों के अध्ययन मंडलों (Board of Studies) के 500 से अधिक संयोजकों व सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
अतुल लिमये जी ने कहा कि देश को ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प को सिद्ध करने के लिए शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों के भीतर देशप्रेम, चरित्र-निर्माण और संवेदनशीलता का बीजारोपण करे। इसके लिए पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय दृष्टिकोण का समावेश किया जाना परम आवश्यक है। शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन लाने के लिए किसी दूसरे के पहल करने की प्रतीक्षा न करते हुए, हम सभी को स्वयं आगे बढ़कर प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि पूर्व में शैक्षणिक परिसरों में विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महान राष्ट्रनायकों और आदर्श व्यक्तित्वों के विषय में सिखाने के बजाय, वामपंथी विचारधारा को अनुचित प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने कहा कि शिक्षा निष्पक्ष और तटस्थ भाव से दी जानी चाहिए। पाठ्यक्रम में बदलाव करते समय सबसे पहले इस बात का आत्मनिरीक्षण (समीक्षा) होना चाहिए कि “क्या नहीं चाहिए”, और तत्पश्चात् यह तय किया जाए कि “क्या समाविष्ट करना है”। इतिहास के साथ-साथ पर्यावरण, विज्ञान, राजनीति विज्ञान और न्यायशास्त्र जैसे विषयों में भी भारतीय दृष्टिकोण और ज्ञान का समावेशन किया जाना चाहिए।
उन्होंने आह्वान किया कि -
- प्रत्येक विषय के लिए स्वतंत्र अध्ययन समूह बनाए जाएं, जिनमें BoS सदस्यों के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र के विषय-विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
- भारतीय भाषाओं के माध्यम से तकनीकी शिक्षा प्रदान करने पर विशेष बल दिया जाए।
- विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक समस्याओं पर व्यावहारिक प्रोजेक्ट्स दिए जाएं, जिससे उनके भीतर सामाजिक संवेदनशीलता विकसित हो सके।
- शैक्षणिक क्षेत्र में हो रहे उत्कृष्ट प्रयोगों और नवाचारों का संकलन कर एक ‘डेटा/सूचना बैंक’ तैयार किया जाए।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि रखते हुए पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत अध्यक्ष रविकुमार चिटणीस ने कहा कि पुणे प्रारंभ से ही शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा है। इस संवाद के माध्यम से युवाओं का सर्वांगीण मार्गदर्शन कर उन्हें ‘समर्थ भारत’ के निर्माण हेतु प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. आर. शंकरानंद जी ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न करना, उनका व्यक्तित्व परिष्कृत करना और चरित्र-निर्माण करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय दृष्टिकोण कोई एकांगी विचार नहीं, बल्कि एक संपूर्ण और समग्र दृष्टिकोण है।



