मुरैना, मध्यप्रदेश
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त मुरैना में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि दुनिया में केवल हिन्दू समाज ही ऐसा है, जो संपूर्ण विश्व के मंगल की कामना करता है। हिन्दू परंपरा सम्मान, समरसता और कर्तव्यबोध पर आधारित है, जो उसे अन्य मत-पंथों से अलग पहचान देती है।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक आक्रमणकारी भारतीय संस्कृति में आत्मसात हो गए, लेकिन बाद के आक्रांताओं ने देश को गुलामी की जंजीरों में बांधा और समाज को कमजोर किया। जब देश अंग्रेजी शासन के अधीन था और भारतवासी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब पूजनीय डॉ. हेडगेवार जी ने गहराई से विचार किया कि जिस भारत ने ज्ञान, विज्ञान, संगीत, व्यापार, कृषि, चिकित्सा और सामर्थ्य के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व किया, वही देश लगभग एक हजार वर्षों तक विदेशी शासन का शिकार कैसे बना।
डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि देश की इस स्थिति का मूल कारण सामाजिक विखंडन था। अमीरी-गरीबी, ऊंच-नीच, जातिवाद और क्षेत्रवाद जैसी विभाजनकारी प्रवृत्तियों ने समाज को संगठित नहीं रहने दिया, जिसका लाभ मुगलों और अंग्रेजों ने उठाया। इसी चिंतन के आधार पर डॉ. हेडगेवार ने यह विचार प्रतिपादित किया कि भारत में रहने वाले सभी लोग, जो किसी भी पूजा पद्धति या परंपरा का पालन करते हों, लेकिन भारत को अपना मानते हों, वे सभी हिन्दू हैं और उन्हें संगठित करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई।
उन्होंने कहा कि संघ के विस्तार के साथ ही संगठन पर अनेक आरोप लगाए गए। सबसे पहले महात्मा गांधी की हत्या का असत्य आरोप संघ पर लगाया गया, लेकिन न्यायालय ने संघ को दोषमुक्त किया। इसके बाद भी संघ पर प्रतिबंध लगाए गए, किंतु प्रत्येक प्रतिबंध के बाद संघ और अधिक संगठित एवं सशक्त होकर सामने आया।
आज देशभर में लगभग 1,30,000 सेवा कार्य चल रहे हैं। विद्या भारती देश में लगभग 25,000 विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें करीब 40 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की विशेषता यह है कि वह सभी का सम्मान करता है। हालांकि, अतीत में विदेशी आक्रांताओं ने हमारे मठ-मंदिरों, संस्कृति और परंपराओं को नष्ट किया और आज भी कुछ मत-पंथ स्वयं को श्रेष्ठ घोषित करते हैं। इसके विपरीत हिन्दू धर्म कर्तव्य को धर्म मानता है, भारत को माता और प्रकृति को ईश्वर का अंश मानता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने भी रामसेतु निर्माण से पूर्व समुद्र से अनुमति ली थी, जो हमारी परंपरा की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
संपूर्ण हिन्दू समाज समान है, कोई छोटा या बड़ा नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि समाज अपनी शक्ति को संगठित रखे। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य के माध्यम से सशक्त एवं सुसंस्कृत समाज के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में विभाग संघचालक महेंद्र जी शर्मा एवं नगर संघचालक महेश जी मोदी मंचासीन रहे।



