पौड़ी, उत्तराखण्ड
पहाड़ों में रिवर्स पलायन अब केवल चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम जमीन पर भी साफ दिखाई देने लगे हैं। कई युवा शहरों की नौकरी छोड़कर अपने गांव लौट रहे हैं और स्थानीय संसाधनों के सहारे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है प्रवीन रौथाण की जिन्होंने शहरों की नौकरी को अलविदा कहकर गांव में रहकर स्वरोजगार की नई शुरुआत की है। पत्नी पूजा रौथाण के साथ मिलकर वह मशरूम, कीवी और मौसमी साग-सब्जियों का उत्पादन कर अपनी आजीविका को मजबूत बना रहे हैं।
बता दें प्रवीन कोरोना महामारी के दौरान वह गांव लौट आए। गांव लौटने के बाद उन्होंने अपनी जमीन, मिट्टी और जलवायु को समझा और इसे अवसर में बदलने का संकल्प लिया। बीते तीन वर्षों से प्रवीन और उनकी पत्नी मिलकर मशरूम और कीवी उत्पादन का कार्य कर रहे हैं। प्रवीन बताते हैं कि वह हर महीने औसतन दो क्विंटल मशरूम की आपूर्ति रुद्रप्रयाग और श्रीकोट बाजार में कर रहे हैं, जिससे उन्हें 45 से 50 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है। इसके साथ ही घर के पास अपने निजी खेत में कीवी की खेती भी कर रहे हैं। इस वर्ष बीते दो महीनों में वह 250 रुपये प्रति किलो के भाव से डेढ़ क्विंटल कीवी बेच चुके हैं। प्रवीन का कहना है कि शहरों में सात साल की नौकरी के दौरान उन्हें इतनी ही आय होती थी, जिससे केवल परिवार का खर्च ही चल पाता था। वहीं अब गांव में रहकर खेती और मशरूम उत्पादन से बेहतर आमदनी हो रही है।



