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श्री राम मंदिर परिसर में साध्वी ऋतंभरा ने फहराई मां भगवती की ध्वजा, मातृशक्ति को दिया संस्कृति रक्षा का संदेश

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श्री राम मंदिर परिसर में साध्वी ऋतंभरा ने फहराई मां भगवती की ध्वजा, मातृशक्ति को दिया संस्कृति रक्षा का संदेश

 

अयोध्या में गूंजा मातृशक्ति का संकल्प, साध्वी ऋतंभरा ने किया ध्वजारोहण

अयोध्या, उत्तर प्रदेश


श्रीराम
जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर के परकोटा के वायव्य कोण पर निर्मित मां भगवती मंदिर के शिखर पर शुक्रवार को पूज्य साध्वी ऋतंभरा ने दुर्गा वाहिनी की पदाधिकारी बहनों के साथ विधिवत ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मातृशक्ति, संत-महात्मा, ट्रस्ट के पदाधिकारी, न्यासीगण एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग चार हजार महिलाओं की उपस्थिति ने इसे विशेष स्वरूप प्रदान किया।




ध्वजारोहण के उपरांत आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि भारत की नई पीढ़ी को भारतीय नारी होने का वास्तविक अर्थ समझाना होगा। उन्होंने कहा कि हमारी संतानों को यह पता होना चाहिए कि माथे के सिंदूर का महत्व क्या है भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता की रक्षा का दायित्व घर-घर की मातृशक्ति के कंधों पर है।




अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का स्मरण करते हुए कहा कि सदियों से अवध के सीने में जो पीड़ा थी, वह अब समाप्त हो चुकी है। रामलला की पुनः प्रतिष्ठा के साथ राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण हुआ है।   

उन्होंने कविता के माध्यम से कहा कि  -

जो कील अवध के सीने में, सदियों से पड़ी कसकती थी

लज्जित थी पीढ़ी दर पीढ़ी, सदियों तक श्राप समझती थी

तुमने झटके से खींच उसे, फेंका सरयू के पानी में

फिर जग ने देखा एक बार लहराता ज्वार जवानी में

हम केवल नहीं भजनिए हैं, यह बात उन्हें समझाई है

हम समर बांकुरे राघव के, तुमको सौ बार बधाई है

साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि राम जन्मभूमि के लिए अनेक पीढ़ियों ने संघर्ष किया, त्याग और बलिदान दिए, माताओं ने अपने पुत्रों का समर्पण किया और सरयू का जल बलिदानियों के रक्त से लाल हुआ। उन्होंने कहा कि आज मां भगवती के मंदिर पर फहराने वाली ध्वजा उसी समर्पण, त्याग और आस्था का प्रतीक है।

मातृशक्ति को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता और उच्छृंखलता में अंतर समझना आवश्यक है। भारतीय नारी केवल परिवार की संरक्षक नहीं, बल्कि राष्ट्र और संस्कृति की भी रक्षक है। उन्होंने महिलाओं से अपने बच्चों में संस्कार, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का विकास करने का आह्वान किया।


साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि आज आवश्यकता है कि प्रत्येक बेटी को आत्मरक्षा, आत्मसम्मान और संस्कृति संरक्षण के संस्कार दिए जाएं। उन्होंने समाज से संकल्प लेने का आग्रह किया कि बेटियां किसी भी प्रकार के सामाजिक षड्यंत्र और भ्रम का शिकार हों।  साथ ही गौसंरक्षण को भी समाज का महत्वपूर्ण दायित्व बताते हुए उन्होंने कहा कि गौमाता के सम्मान और संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की माताओं को पुनः कौशल्या, सुनैना, अंजनी और देवकी जैसी आदर्श माताओं की भूमिका निभानी होगी। राष्ट्र सर्वोपरि है और प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह भारत की संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को सुरक्षित रखे।


कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की मीनाक्षी ताई, हरिद्वार से आई महामंडलेश्वर साध्वी मैत्री, केंद्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति तथा साध्वी परिषद की महामंत्री साध्वी प्रज्ञा भारती ने भी अपने विचार व्यक्त किए...

इससे पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उपस्थित मातृशक्ति को मंदिर परिसर एवं परकोटा की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि कार्यक्रम में वात्सल्य परिवार की लगभग 60 बालिकाएं, माताएं और साध्वियां, दुर्गा वाहिनी की लगभग 250 कार्यकर्तियां तथा अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों से आईं 3500 से अधिक महिलाएं शामिल हुईं। कार्यक्रम में लगभग चार हजार महिलाओं की उपस्थिति रही।



समारोह में ट्रस्टी कृष्ण मोहन, महंत दिनेन्द्र दास, डॉ. अनिल मिश्रा तथा मंदिर व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ विश्व हिंदू परिषद पदाधिकारी गोपाल नागरकट्टे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।