कानपुर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रान्त द्वारा बेनाझाबर में मीडिया संवाद का आयोजन किया गया। संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर जी ने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष में विविध प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। यह क्रम विजयादशमी 2025 से प्रारंभ हुआ था। इसके बाद पथ संचलन, व्यापक गृह संपर्क व हिन्दू सम्मेलन पूरे देश में हुए।
संघ की 100 वर्ष की यात्रा में अनेक चरण आए। 1925 में जब भारत अपनी स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहा था, उस समय डॉ. हेडगेवार के मन में यह विचार आया कि हम स्वतंत्र तो हो जाएंगे, लेकिन यह स्वतंत्रता टिकी कैसे रहे, इसके लिए कार्य करने की आवश्यकता है। परिस्थितियों का अध्ययन कर उनके ध्यान में आया कि हमें अपने देश को संगठित और सशक्त बनाने की आवश्यकता है। इस विचार को लेकर गांधी जी, सुभाष चन्द्र बोस और लोकमान्य तिलक जैसे उस समय के सभी महापुरुषों से मिले। अधिकांश की प्राथमिकता थी कि पहले देश स्वतंत्र हो जाए, फिर इस पर भी विचार कर लेंगे।
किन्तु डॉ. हेडगेवार जी का मानना था कि ये दोनों कार्य साथ-साथ चल सकते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण कारावास भी झेला। संघ की स्थापना के बाद भी जंगल सत्याग्रह में भाग लेने के कारण कारावास झेला। डॉ. हेडगेवार अनुशीलन समिति के भी सदस्य रहे।
नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि संघ को नाम या प्रसिद्धि की कामना नहीं है। हम सिर्फ दैनिक शाखा के माध्यम से समाज के प्रति संवेदनशील व व्यक्तिगत चरित्र निर्माण का कार्य करते हैं। प्रारंभ में सभी डॉ. हेडगेवार का उपहास करते थे, किन्तु संघ स्थापना से 1940 में उनकी मृत्यु तक मात्र 15 वर्षों में उन्होंने संघ का विस्तार पूरे भारत में कर दिया था। उस समय आज का पाकिस्तान और बांग्लादेश भी भारत का ही भाग था।
उन्होंने कहा कि संघ का विरोध भी होता है, लेकिन हमारा कोई विरोधी नहीं है। वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, वह स्वाभाविक है। संघ पर आपातकाल में भी प्रतिबन्ध लगा था, लेकिन हम चुपचाप कार्य करने में विश्वास रखते हैं। आज संघ का काम समाज के सहयोग से बढ़ा है। पूरे देश में लगभग 55,700 स्थानों पर 89,000 शाखाएं तथा लगभग 23000 स्थानों पर 32,600 से अधिक मिलन चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संघ ने शताब्दी वर्ष में पांच बिन्दुओं पर कार्य करने का निर्णय लिया है। सामाजिक समरसता अर्थात मंदिर, श्मशान और कुआं सबके लिए होना चाहिए। कुटुंब प्रबोधन अर्थात परिवारों को भारतीय मूल्यों और संस्कारों के आधार पर विकसित करना। पर्यावरण अर्थात पेड़, पानी और प्लास्टिक के सम्बन्ध में कार्य करना। स्व-आधारित जीवन शैली और स्वदेशी को अपनाने पर बल देना। अपनी वेशभूषा व अपने खानपान को प्राथमिकता देना। इसके अतिरिक्त नागरिक कर्तव्यों को ध्यान में रखकर कार्य करना आवश्यक है। हमारे संविधान में अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य भी दिए हैं। इन कर्तव्यों की भी चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि संघ एक आंदोलन है। इसका उद्देश्य सशक्त, संगठित व समरस राष्ट्र बनाना है। इसके लिए सभी का सहयोग व समर्थन चाहिए है। तभी सफलता मिलेगी। संघ की प्रार्थना नमस्ते सदा वत्सले … की अंतिम पंक्ति भारत माता की जय है। हम इसी के लिए कार्य कर रहे हैं।
मीडिया से कम संवाद करने के प्रश्न उन्होंने कहा कि 1994 में प्रचार विभाग बना। लगभग 2005-06 से हमने मीडिया संवाद बढ़ाना शुरू किया है और हम निरंतर यह क्रम बढ़ा रहे हैं। संघ में नियमित रूप से समाचार देने के लिए ऐसा कुछ नहीं होता है।
युवाओं से संघ का जुड़ाव कम होने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ज्वाइन आरएसएस के माध्यम से प्रतिवर्ष हजारों युवा पंजीकरण करवा रहे हैं। प्राथमिक वर्ग युवा स्वयंसेवकों को एक बार ही करना होता है। इसमें 1.24 लाख से अधिक स्वयंसेवक भाग लेते हैं। महिलाओं की भागीदारी से संबंधित प्रश्न पर उन्होंने कहा कि हम किसी विषय पर प्रतिक्रिया से अधिक कार्य करने पर विश्वास रखते हैं। हमारे अन्य सहयोगी संगठनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़े, इसके लिए कार्य हो रहा है। सेवा कार्यों में भी महिलाओं की सक्रियता है। इसके अतिरिक्त राष्ट्र सेविका समिति भी महिलाओं में निरंतर कार्य कर रही है।
मुस्लिमों को संघ से जोड़ने के प्रश्न पर नरेंद्र जी ने कहा कि हमारे लिए सभी भारतवासी हिन्दू हैं। इसलिए कोई भी संघ में आ सकता है। हम किसी वर्ग विशेष को संघ से जोड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलाते हैं, लेकिन हमारी शाखाओं में किसी भी पूजा पद्धति को मानने वाले व्यक्ति के आने पर कोई रोक नहीं है।



