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अब स्थानीय धार्मिक मेलों का खर्च भी उठाएगी प्रदेश सरकार

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अब छोटे धार्मिक मेलों का खर्च भी सरकार उठाएगी।

 2025-26 में 50 करोड़ रुपये मेलों पर खर्च होंगे।

स्थानीय आस्था और परंपराओं को मिलेगी पहचान।

प्रदेश सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षण देने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है, जी हां अब केवल बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक मेलों ही नहीं, बल्कि शहरों और कस्बों में लगने वाले छोटे धार्मिक मेलों के आयोजन का खर्च भी सरकार उठाएगी। बता दें इस पहल का उद्देश्य उन मेलों को पहचान और सहयोग देना है, जो वर्षों से स्थानीय आस्था का केंद्र रहे हैं, लेकिन अब तक शासन स्तर पर पर्याप्त सहयोग नहीं पा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में मेलों के लिए स्वीकृत 50 करोड़ रुपये की राशि इसी योजना के माध्यम से खर्च की जाएगी। साथ ही नगर विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निकायों से प्रस्ताव मांगे हैं। इन प्रस्तावों में यह जानकारी ली जा रही है कि संबंधित क्षेत्र में कितने धार्मिक मेले आयोजित होते हैं, उनका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व क्या है और उनमें श्रद्धालुओं की संख्या कितनी रहती है। 

सरकार का मानना है कि प्रदेश में कई ऐसे धार्मिक मेले हैं, जो बड़े स्तर पर प्रचारित नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए उनका विशेष महत्व है।  हालांकि जिन जिलों से अभी तक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुए हैं, उन्हें जल्द विवरण उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजे जाएंगे। इस वित्तीय वर्ष में उपलब्ध धनराशि निकायों को दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर वर्ष 2026-27 के बजट में भी अतिरिक्त प्रावधान किया जाएगा। इस निर्णय से स्थानीय धार्मिक परंपराओं को नई पहचान मिलने के साथ-साथ बेहतर व्यवस्थाओं का मार्ग भी श्रेष्ठ होगा।