• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका नहीं डालने देंगे – विश्व हिन्दू परिषद

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

नई दिल्ली 

विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय और विधि के शासन को सुदृढ़ करने वाला है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मतांतरण के पश्चात कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) की संवैधानिक श्रेणी में नहीं आता और ऐसे में उसे SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता। यह निर्णय संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 की भावना के भी अनुरूप है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल हिन्दू, सिक्ख और बौद्ध धर्म के अनुयायी ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने वाला है, जिनमें कुछ लोग मतांतरण के बाद भी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर संवैधानिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस निर्णय से मतांतरण माफिया पर गहरी चोट लगी है। कुछ लोग एक ओर दावा करते हैं कि उनका धर्म समतावादी है, उनके यहां जाति-पाति की व्यवस्था नहीं है। वहीं, दूसरी ओर वे दलित ईसाई व दलित मुस्लिम जैसे शब्दों की रचना करके उनके लिए आरक्षण की मांग करते हैं। जिससे उनके धर्मांतरण के कुचक्रों को गति मिल सके।

डॉ. जैन ने कहा कि अनुसूचित जाति के अधिकार और संरक्षण का उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय को दूर करना है, जो विशेष रूप से हिन्दू समाज की संरचना में उत्पन्न हुआ था। अतः जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से मतांतरण  करता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से भी स्वयं को अलग कर लेता है, जिसके आधार पर विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति पुनः हिन्दू, सिक्ख या बौद्ध धर्म में लौटता है और समाज द्वारा उसे स्वीकार किया जाता है, तभी वह पुनः अनुसूचित जाति के अधिकारों का पात्र बन सकता है।

विहिप पदाधिकारी ने कहा कि यह निर्णय देश में सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और न्याय की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विहिप के कार्यकर्ता देशभर में ऐसे लोगों की सूची बनाएंगे, जिन्होंने अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका डाला है।