युवा भारत, सशक्त उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले के किसी भी कस्बे में चले जाइए, शाम के वक्त चौराहे पर खड़े लड़कों की बातचीत सुन लीजिए। वहाँ फॉर्म की तारीखें हैं, रिजल्ट का इंतजार है, कोचिंग की फीस है, और कहीं भीतर एक सवाल है जो हर पीढ़ी पूछती आई है कि मेरा नंबर कब आएगा? यह सवाल छोटा नहीं है। भारत के पास आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, और इस आबादी की सबसे बड़ी माँग पैसा नहीं, भरोसा है।
दिलचस्प बात यह है कि इस भरोसे को गढ़ने की कोशिश आज तीन जगहों से एक साथ हो रही है। संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी युवाओं से सीधे बैठकर बात कर रहे हैं। लाल किले से माननीय प्रधानमंत्री जी कह रहे हैं कि सपना आप लाइए, संसाधन हम देंगे। और लखनऊ में माननीय मुख्यमंत्री जी नियुक्ति-पत्र बाँटते हुए तारीख नोट करा रहे हैं। ये तीनों अलग-अलग स्वर हैं, पर सुर एक है। यही सुर इस लेख का विषय है।
उत्तर प्रदेश: जब भर्ती का मतलब भर्ती हो गया: बहुत पुरानी बात नहीं है जब उत्तर प्रदेश में परीक्षा देना और नौकरी पाना दो बिल्कुल अलग घटनाएँ मानी जाती थीं। बीच में पेपर लीक होता था, रिजल्ट अटकता था, मामला अदालत जाता था और तब तक अभ्यर्थी की उम्र निकल जाती थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने हाल ही में इसी पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि गलती युवाओं की नहीं थी, आयोगों में बैठे लोगों की थी।
आज तस्वीर दूसरी है। साढ़े नौ वर्षों में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है, और वह भी बिना किसी सिफारिश के। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हजारों युवाओं को नियुक्ति-पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री जी ने अगली घोषणा भी कर दी, आने वाले 6 महीनों में डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार, हर सप्ताह चरणबद्ध भर्तियों के साथ। किसी भी सरकार के लिए यह आसान वादा नहीं होता, क्योंकि इसमें तारीख भी दर्ज हो जाती है और जवाबदेही भी।
इस बदलाव के पीछे योजनाओं की एक पूरी शृंखला है, जो अलग-अलग जरूरतों को छूती है मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान और युवा स्वरोजगार योजना उन्हें, जो नौकरी माँगने के बजाय देना चाहते हैं; अभ्युदय कोचिंग योजना उन्हें, जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी तो करना चाहते हैं पर फीस नहीं जुटा पाते; ओडीओपी और इन्वेस्ट यूपी उन्हें, जो अपने ही जिले में कुछ खड़ा करना चाहते हैं; खेलो इंडिया और मिशन शक्ति उन्हें, जिनका रास्ता मैदान से या हिम्मत से होकर जाता है।
आउटसोर्स कार्मिक: वह वर्ग जिसकी चर्चा कम हुई: सरकारी व्यवस्था की एक बड़ी परत ऐसी है जिस पर आम तौर पर बहस नहीं होती आउटसोर्स कार्मिक। दफ्तर खोलने से लेकर फाइल पहुँचाने तक, अस्पताल के वार्ड से लेकर कंप्यूटर की एंट्री तक, प्रदेश की व्यवस्था इन्हीं हाथों से चलती है। पर इनकी सेवा-शर्तें अक्सर अस्पष्ट रहीं, भुगतान में देरी होती रही, और बीच की एजेंसियों पर सवाल उठते रहे।
माननीय मुख्यमंत्री जी ने इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संपूर्ण आउटसोर्स मानव संसाधन प्रबंधन के डिजिटल एकीकरण के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) का निर्माण उन्होंने अपनी सरकार में करा दिया है। अब पूरा रिकॉर्ड एक जगह डिजिटल होगा, तो बीच का अँधेरा अपने-आप कम हो जाएगा भुगतान दिखता है, नियुक्ति दिखती है, और शोषण की गुंजाइश घटती है।
सरसंघचालक मोहन भागवत जी की दृष्टि: स्वतंत्रता दिवस पर मोहन भागवत जी ने विद्यार्थियों और जेन-जी युवाओं के साथ सीधा संवाद किया। उन्होंने भारत की युवा आबादी को देश का सबसे बड़ा ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ बताया, पर साथ ही एक चेतावनी भी दी जो याद रखने लायक है, यदि इस पीढ़ी को सही दिशा, शिक्षा, अवसर और उत्तरदायित्व का बोध न मिले, तो यही शक्ति समाज पर बोझ भी बन सकती है। भाषाओं और परंपराओं की इस विविधता के बीच संविधान और कानून की मर्यादा बनाए रखना उन्होंने आवश्यक बताया।
एक और अवसर पर उन्होंने जेन जी के बारे में जो कहा, वह और भी उल्लेखनीय है। उन्होंने इसे देश की सबसे ईमानदार पीढ़ी कहा, जो हर बात का तार्किक उत्तर चाहती है, और स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन करना अपने-आप में राष्ट्रविरोधी नहीं है। संघ के मंचों से यह संदेश भी बार-बार दोहराया गया है कि राष्ट्र-निर्माण किसी सरकार या संगठन का ठेका नहीं। यह तय करना हर युवा का अपना काम है कि वह देश के लिए क्या कर सकता है।
प्रधानमंत्री जी का भरोसा: लाल किले से इस बार मा. प्रधानमंत्री मोदी जी ने विकसित भारत 2047 और ‘शक्ति की सप्तधारा’ की बात करते हुए एक वाक्य कहा जो पूरे भाषण का सार था कि विकसित भारत का सबसे बड़ा साधक भी युवा है और सबसे बड़ा लाभार्थी भी वही। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सपना लेकर आगे आएँ, संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। सस्ते डेटा और स्टार्टअप की जिस लहर ने पिछले वर्षों में छोटे शहरों के लड़के-लड़कियों को आगे बढ़ाया, वह इस भरोसे का प्रमाण भी है।
मुख्यमंत्री योगी जी: वादे से क्रियान्वयन तक - उत्तर प्रदेश में मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कार्यशैली की एक विशेषता है कि वे संख्या और तारीख के साथ बात करते हैं। पारदर्शी भर्ती, समयबद्ध परिणाम, स्वरोजगार की योजनाएँ, कोचिंग की सहायता और अब आउटसोर्स कार्मिकों के लिए UPCOS इन सबको जोड़कर देखा जाए तो एक ऐसे प्रदेश की रूपरेखा बनती है जहाँ तकनीक पारदर्शिता लाती है, व्यवस्था सुरक्षा देती है और हर हाथ के श्रम को सम्मान मिलता है। ‘उत्तर प्रदेश युवा संवाद’ जैसे मंचों के माध्यम से वे स्वयं युवाओं के प्रश्नों के सामने बैठने की परंपरा भी बना रहे हैं, जो नीति और जनता के बीच की दूरी को लगातार कम करती है।
आगामी युवा नीति: संक्षेप में - प्रदेश की आगामी युवा नीति का शीर्षक ही अपनी बात कह देता है ‘सशक्त युवा, समर्थ उत्तर प्रदेश’। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग के माध्यम से क्रियान्वित होने वाली इस नीति में युवा की आयु-सीमा 16 से 35 वर्ष रखी गई है, जबकि राष्ट्रीय नीति में यह 15 से 29 वर्ष है। यानी तीस पार करके भी संघर्ष कर रहा व्यक्ति अचानक ‘युवा’ की परिभाषा से बाहर नहीं होगा।
आठ कार्यक्षेत्र - शिक्षा-कौशल, रोजगार- उद्यमिता, स्वास्थ्य, नेतृत्व एवं सामाजिक कार्य, खेल-फिटनेस, कला-संस्कृति, पर्यावरण सुरक्षा तथा समावेशन-समता को एक ढाँचे में पिरोती है। प्रदेश स्तर पर उत्तर प्रदेश युवा कल्याण बोर्ड (अध्यक्षता मुख्यमंत्री जी या नामित प्रतिनिधि द्वारा), हर जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला युवा कल्याण समिति, और निगरानी हेतु एक स्वतंत्र विशेषज्ञ आयोग प्रस्तावित है। MYUVA, युवा स्वरोजगार योजना, अभ्युदय कोचिंग, ODOP, इन्वेस्ट यूपी, आयुष्मान भारत, मिशन शक्ति और खेलो इंडिया जैसी बिखरी योजनाओं को एक सूत्र में पिरोया गया है, तथा एसडीजी लक्ष्यों, जी-20/वाई-20 मंचों, सिंगापुर की स्किल्सफ्यूचर और जर्मनी-दक्षिण कोरिया की द्वैध-व्यावसायिक प्रणाली को मानक बनाया गया है। प्रदेश के युवाओं की अपनी सफलता-गाथाएँ भी दस्तावेज़ का हिस्सा हैं, ताकि यह केवल आदेशों का पुलिंदा न रहे। इसी नीति के जन-संवाद रूप में ‘उत्तर प्रदेश युवा संवाद’ की रूपरेखा तैयार है। पहले लखनऊ में प्रदेश-स्तरीय आयोजन, फिर हर जनपद और विश्वविद्यालय तक विस्तार।
स्वतंत्रता दिवस 2026 पर लखनऊ में विधान भवन के प्रांगण से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने इसी नीति की घोषणा को दोहराते हुए एक नया आयाम जोड़ा उन्होंने आज की पीढ़ी को ‘जेन-जी और जेन एआई’ कहकर संबोधित किया और निर्देश दिया कि नीति में डिजिटल सशक्तीकरण को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नीति बनाने से पहले 16-35 आयु वर्ग के युवाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को समझा जाए और सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो, ताकि हर पात्र युवा तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पहुँचे।
मोदी सरकार के 12 वर्ष: बीते बारह वर्षों की उपलब्धियों को गिनाना आसान है, पर हर आँकड़े के पीछे एक चेहरा है। पाँच करोड़ सैंतीस लाख आवास का मतलब है उतने ही परिवार जिनके सिर पर अब अपनी छत है। दस करोड़ तैंतीस लाख उज्ज्वला कनेक्शन का मतलब है उतनी रसोइयाँ जहाँ धुआँ कम हुआ। इसी दृष्टि से इन उपलब्धियों को देखा जाना चाहिए।
योगी सरकार के साढ़े नौ वर्ष: साढ़े नौ वर्ष किसी प्रदेश के जीवन में लंबा समय नहीं होता, पर उत्तर प्रदेश के लिए यह अवधि पहचान बदलने वाली रही। जिस राज्य का नाम कभी अव्यवस्था के साथ लिया जाता था, वहाँ आज बेरोजगारी दर 18 प्रतिशत से घटकर 2.21 प्रतिशत है और स्टार्टअप इकोसिस्टम में यह देश का चौथा बड़ा राज्य है।




