श्रद्धेय अशोक सिंहल जी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर कुरनूल शहर के वेंकटरमणा कॉलोनी स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी कल्याण मंडप में "विशिष्ट जन सम्मेलन" आयोजित किया गया।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि, केंद्रीय
संयुक्त महामंत्री श्री कोटेश्वर शर्मा जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि
श्रद्धेय अशोक सिंहल जी ने हिन्दू समाज के सशक्तिकरण और संगठन के लिए अपना संपूर्ण
जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने विश्व हिन्दू परिषद के विस्तार के साथ-साथ समाज
में युगांतकारी परिवर्तन लाने के उद्देश्य से विभिन्न आयामों और विभागों की नींव
रखी। 'धर्म संसद' और संतों के सम्मेलनों के माध्यम से
उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्त हिन्दू एक समान हैं; प्राचीन
हिन्दू समाज में जातिभेद और अस्पृश्यता जैसी कुरीतियां नहीं थीं। गुलामी के कालखंड
में पनपी इस छुआछूत की कुप्रथा को समाप्त करने के लिए उन्होंने 'सामाजिक
समरसता विभाग' का गठन किया। इसी प्रकार, हिन्दू
धर्म छोड़कर अन्य मतों में चले गए बंधुओं की घर-वापसी के लिए 'धर्म
प्रसार विभाग' और वैदिक ज्ञान की रक्षा हेतु 'वेद
विद्यालयों' की स्थापना की।
श्री कोटेश्वर शर्मा जी ने आगे कहा कि अयोध्या आंदोलन का सफल
नेतृत्व कर श्री राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण में सिंघल जी की
अग्रणी भूमिका रही। आज समाज में 'पंच परिवर्तन' का
होना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में हिन्दू समाज पूजा-पाठ, अनुष्ठान
और धार्मिक आयोजनों में तो आगे है, परंतु
जीवन मूल्यों के वास्तविक आचरण में पीछे रह जाता है; उदाहरणार्थ
'सत्य वचन' के सिद्धांत को व्यवहार में उतारने में
हम चूक जाते हैं। इसके साथ ही, भारत की आत्मा परिवार व्यवस्था में
निहित है, जो आज कमजोर पड़ती दिख रही है।
उन्होंने आह्वान किया कि अशोक सिंघल जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर हमें अपनी
परिवार व्यवस्था को पुनः सशक्त करना होगा।



