मुंबई
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित I.I.M.U.N. के कार्यक्रम में युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम में देश के 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2,000 हाई स्कूल विद्यार्थी शामिल रहे।
कार्यक्रम में सरसंघचालक जी के साथ के प्रमुख बिन्दु
- यदि जेन-जी आंदोलन कर रही है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह राष्ट्र विरोधी है।
- नई पीढ़ी अपने ही समाज और राष्ट्र का हिस्सा है; उन्हें “अपने” मानकर समझने की आवश्यकता है।
- सार्थक संवाद के लिए अपनत्व का संबंध होना चाहिए।
- जब संवाद अपनत्व के साथ होता है, तभी एक-दूसरे की बात को सही ढंग से समझा जा सकता है।
- आज की जेन-जी और जेन-अल्फा हमारी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं।
- यदि मुझे दोनों पीढ़ियों में किसी एक पर विश्वास करने के लिए कहा जाए, तो मैं जेन-जी पर विश्वास करूँगा।
शिक्षा एवं नई पीढ़ी
- 1. शिक्षा कोई व्यावसायिक व्यवसाय नहीं है, बल्कि जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता है।
- 2. शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति तक उसकी पहुँच सुनिश्चित होनी चाहिए।
- 3. शिक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
- 4. शिक्षा का उद्देश्य केवल धन अर्जित करना या विद्यालयों का संचालन करना नहीं होना चाहिए।
- 5. जो लोग शिक्षा प्रदान करते हैं, उनका भी उचित प्रशिक्षण होना आवश्यक है।
- 6. शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 6% व्यय करने की मांग लंबे समय से चली आ रही है, और मैं उसका समर्थन करता हूँ।
- 7. हमारे संगठन भी बड़े स्तर पर विद्यालयों का संचालन करते हैं। हमारे कई हजार विद्यालय चल रहे हैं।
- 8. शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए हर बार आंदोलन आवश्यक नहीं होता। बिना आंदोलन के भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है।
- शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, यह हमारे बच्चों के लिए है। इसलिए हमें भी उसमें योगदान देना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ी का निर्माण है।
सोशल मीडिया
- यदि सोशल मीडिया पर मेरे कारण 10 लाख लोग कोई गलत निर्णय लेते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी मेरी भी है।
- सोशल मीडिया पर सकारात्मक, उपयोगी और समाजहित की सामग्री साझा करनी चाहिए।
- सोशल मीडिया पर केवल प्रामाणिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करना चाहिए।
- जेन-जी में भी यह विवेक विकसित होना चाहिए कि क्या सही है और क्या नहीं।
- वरिष्ठ पीढ़ी की भी जिम्मेदारी है कि वह नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करे तथा उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझाए।
रोल मॉडल, राष्ट्रीय दृष्टिकोण एवं वैश्विक संबंध
- जेन-जी को हिंसक रोल मॉडल का अनुसरण नहीं करना चाहिए।
- दो देशों के बीच संघर्ष की स्थिति में नागरिकों को अपनी सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए।
- भारत की नीति किसी देश को पराजित करना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से सद्भाव स्थापित करना है।
- किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान संवाद और शांतिपूर्ण प्रयासों से ही संभव है।
- सभी पाकिस्तानी भारत के शत्रु नहीं हैं; लोगों और परिस्थितियों में अंतर समझना चाहिए।
- संघर्ष के समय सरकार जो निर्णय ले, उसका समर्थन करना चाहिए।
- मानवता सर्वोपरि है
एलजीबीटी एवं विवाह
- एलजीबीटी (LGBT) समुदाय के लोग भी हमारे समाज का हिस्सा हैं और समाज को उन्हें स्थान देना चाहिए।
- भारतीय समाज में विवाह का उद्देश्य केवल दो व्यक्तियों का साथ रहना नहीं है।
- विवाह का उद्देश्य उत्तम संतति का निर्माण तथा एक सुदृढ़ समाज की रचना भी माना गया है।
- यदि विवाह संस्था के मूल स्वरूप में परिवर्तन किया जाएगा, तो उसके सामाजिक दुष्परिणाम हो सकते हैं।
- इसी दृष्टि से समलैंगिक विवाह को विवाह नहीं कहा जाना चाहिए।
महिलाओं की भूमिका
- समाज में महिलाओं और पुरुषों की भूमिका समान तथा एक-दूसरे की पूरक है।
- राष्ट्र सेविका समिति का गठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गठन के समय ही हुआ था।
- यह धारणा सही नहीं है कि संघ में महिलाओं का स्थान नहीं है।
- अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में महिलाओं की सहभागिता रहती है और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका होती है।
रोजगार
- रोजगार का अर्थ केवल नौकरी नहीं है।
- उद्यमिता और कौशल भी रोजगार के महत्वपूर्ण आयाम हैं।
- बेरोजगारी कम करने के लिए सभी प्रकार के कार्यों को समान सम्मान देना आवश्यक है।
- समाज में श्रम-प्रतिष्ठा का भाव विकसित होना चाहिए।
आरक्षण
1 . सामाजिक कारणों से आरक्षण की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।
2 . जब तक सामाजिक भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।
3 . बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।
4 . आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
5 यदि सभी उपायों को ईमानदारी और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो भविष्य में आरक्षण की आवश्यकता समाप्त हो सकती है।
सतत विकास एवं पर्यावरण
- संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
- विकास पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना भी संभव है।
- पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की शुरुआत अपने घर और अपने दैनिक जीवन से होनी चाहिए।
नेतृत्व
1 . नेतृत्व का पहला गुण है कि व्यक्ति सबसे पहले स्वयं का नेतृत्व करना सीखे।
2 . सच्चा नेतृत्व भीतर से प्रारंभ होता है।
3 . एक नेता में शास्त्रों में बताए गए पाँच गुण होने चाहिए। पात्रे त्यागी गुणे रागी संविभागी च बन्धुषु। शास्त्रे बोद्धा रणे योद्धा पुरुषः पञ्चलक्षणः॥
4 . नेतृत्व का उद्देश्य केवल अनुयायी बनाना नहीं, बल्कि नए नेताओं का निर्माण करना है ।



