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प्रकृति, परंपरा और रोजगार का संगम-छाती मनकोट

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बागेश्वर, उत्तराखण्ड

छाती मनकोट गांव उत्तराखण्ड का एक छोटा लेकिन प्रेरणादायक गांव है, जहां लोगों ने अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक पहाड़ी खानपान को रोजगार का माध्यम बना लिया है।

अगर आप उत्तराखण्ड घूमने जाएं और वहां की खूबसूरत वादियों के साथ-साथ स्थानीय स्वाद भी चखने को मिल जाए, तो सफर सच में यादगार बन जाता है। छाती मनकोट गांव ऐसा ही एक खास गांव है, जो बागेश्वर जिले में स्थित है। पहाड़ों की गोद में बसा यह छोटा सा गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सादगी भरी जीवनशैली के लिए जाना जाता है। ऊंची-नीची पहाड़ियां, घने जंगल और शांत वातावरण यहां आने वाले हर यात्री को अपनी ओर खींच लेते हैं। यह गांव पिथौरागढ़ को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है, जहां से रोज बड़ी संख्या में यात्री गुजरते हैं। अब गांव वालों ने इस मौके को रोजगार में बदल दिया है। यहां पहुंचते ही यात्रियों का स्वागत होता है पहाड़ के पारंपरिक स्वाद से चूल्हे पर बनती भट्ट की दाल और मंडुवे की रोटी की सोंधी खुशबू हर किसी को रुकने पर मजबूर कर देती है।

प्राकृतिक तरीके से तैयार किया गया यह भोजन न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद है। यही वजह है कि पर्यटक यहां रुककर पहाड़ की असली जिंदगी को करीब से महसूस कर रहे हैं। धीरे-धीरे इस गांव में होमस्टे संस्कृति भी विकसित हो रही है, जिससे पर्यटकों को स्थानीय जीवनशैली को जानने का मौका मिल रहा है और गांव वालों को अपने ही गांव में रोजगार मिल रहा है। आज छाती मनकोट सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का एक सुंदर उदाहरण बनता जा रहा है। यह पहल दिखाती है कि अगर स्थानीय संसाधनों का सही प्रयोग किया जाए, तो छोटा सा गांव भी बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है और पलायन जैसी समस्या को भी रोका जा सकता है।