मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
यह तस्वीरें मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा की हैं। जहां महिलाएं काला सोना तैयार कर रही हैं। काला सोना यानी वर्मी कम्पोस्ट, जो पूरी तरह प्राकृतिक खाद है। गोबर और केंचुओं के इस्तेमाल से बनने वाली ये खाद ऑर्गेनिक खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं यानि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और फसलों को पूरी तरह ऑर्गेनिक बनाती है। यही वजह है कि इस खाद को काला सोना कहा जाता है। क्योंकि ये न केवल पर्यावरण के लिए लाभदायक है। बल्कि सेहत के लिए भी किसी गोल्ड से कम नहीं ठाकुरद्वारा की अंशू चौहान ने सरकारी योजना की मदद से वर्मी कम्पोस्ट बनाने की ट्रेनिंग ली। और फिर कुछ महिलाओं के साथ मिलकर गंगा शक्ति स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दूसरी महिलाओं को भी इस काम की बारीकियां सिखानी शुरू कर दीं।
गंगा शक्ति स्वयं
सहायता समूह द्वारा तैयार काला सोना अब केवल मुरादाबाद तक सीमित नहीं है। बल्कि उत्तराखंड
समेत कई दूर-दराज के इलाकों में इसकी डिमांड है। जिससे महिलाओं की
आमदनी में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।इतना ही नहीं इस ऑर्गेनिक खाद से तैयार फसलें भी लोगों तक शुद्ध रूप में
पहुंच रही हैं। जिससे सेहत और पर्यावरण दोनों को लाभ हो
रहा है। अंशू चौहान और
उनका समूह केवल आमदनी तक सीमित नहीं है। बल्कि अधिक से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर
बनाने पर जोर दे रहा है। अब तक ये समूह लगभग 1200 महिलाओं को काला सोना तैयार करने की ट्रेनिंग दे चुका
है। ठाकुरद्वारा की ये महिलाएं साबित कर रही हैं कि
अगर हौसले मजबूत हों तो साधारण
संसाधनों से भी असाधारण काम किया जा सकता है। काला सोना तैयार
कर ये महिलाएं न केवल अपनी जिंदगी बदल रही हैं, बल्कि समाज को भी
एक नई दिशा दे रही हैं।



