• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

रिक्शा चालक और श्रमिकों के बच्चे सीख रहे AI–कम्प्यूटर

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश

राजमिस्त्री की बेटी हो और रिक्शा चालक का बेटा, होनहार छात्र सीमित साधनों के चलते स्कूल तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन रोजगार तक नहीं पहुंच पाते। सिर्फ किताबें पढ़ लेने से आज के दौर में रोजगार कैसे मिले?

इसी सवाल का जवाब बना AI, कम्प्यूटर और कोडिंग। और इस बदलाव की नींव रखी शाहजहांपुर के इंजीनियर राजीव अग्रवाल ने।

एक संकल्प, जिसने बदली सैकड़ों जिंदगियां

सिविल लाइंस निवासी राजीव अग्रवाल ने वर्ष 2019 में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को तकनीकी शिक्षा देने का संकल्प लिया और फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस की स्थापना की। उनका मानना था कि अगर गरीब बच्चों को सही समय पर तकनीक से जोड़ा जाए, तो वे भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

जिले के 10 स्कूलों में चल रही कम्प्यूटर लैब

फाउंडेशन के जिला समन्वयक भानु कुमार बताते हैं कि—

शाहजहांपुर जिले के 10 स्कूलों में कंप्यूटर लैब संचालित हैं

इनमें गुरुनानक कन्या पाठशाला, आर्य कन्या इंटर कॉलेज, आर्य महिला इंटर कॉलेज प्रमुख हैं

अब तक जिले में 2,084 बच्चों का चयन हो चुका है

बच्चों का चयन स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के माध्यम से किया जाता है

इन लैब में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे रिक्शा चालकों, मजदूरों, राजमिस्त्रियों और दिहाड़ी श्रमिकों के परिवारों से आते हैं।

AI और ChatGPT से पढ़ाई, कोडिंग की बुनियाद

इन कम्प्यूटर लैब में बच्चों को सिर्फ कम्प्यूटर चलाना ही नहीं सिखाया जा रहा, बल्कि—

AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)

ChatGPT जैसे आधुनिक टूल्स

कोडिंग और डिजिटल स्किल्स का बेसिक ज्ञान भी दिया जा रहा है।

फिलहाल 400 से अधिक बच्चे AI आधारित शिक्षा से जुड़ चुके हैं।

IIT से अमेरिका तक, फिर लौटे समाज के लिए

राजीव अग्रवाल ने वर्ष 1985 में IIT रुड़की से इंजीनियरिंग की थी। कुछ साल भारत में काम करने के बाद वे अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने MAQ Software नाम की कंपनी की स्थापना की। आज भी वे समय-समय पर शाहजहांपुर आते रहते हैं।

उनका मानना है कि टैलेंट गांव और गरीब में भी होता है, बस मौका नहीं मिलता। तकनीक वही मौका देती है।

उत्तर प्रदेश के 147 स्कूलों तक पहुँचा मॉडल

राजीव अग्रवाल का यह मॉडल सिर्फ शाहजहांपुर तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के 147 स्कूलों में-

हर स्कूल में 30-30 कंप्यूटर लैब

प्रत्येक लैब में 3 प्रशिक्षक

पूरा खर्च फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस द्वारा वहन किया जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत की नींव

आज सीमित संसाधन वाले बच्चे भी सिर्फ सपने नहीं देख रहे, बल्कि डिजिटल दुनिया में अपने लिए जगह बना रहे हैं।

यह पहल साबित करती है कि सही दिशा, सही शिक्षा और सही तकनीक मिल जाए, तो गरीबी प्रतिभा की राह नहीं रोक सकती।

शाहजहांपुर में AI से शिक्षा पा रहे ये बच्चे आने वाले भारत की सबसे मजबूत तस्वीर हैं।