मथुरा, उत्तर प्रदेश
वर्तमान में विकास के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी आवश्यक है। इसी सोच के तहत अब किसी भी निर्माण कार्य में पेड़ों की कटाई के बदले अधिक से अधिक पौधे लगाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि प्रकृति का संतुलन बना रहे। यह विचार तब आया, जब मथुरा के मिलिट्री स्टेशन में 99 आर्टिलरी ब्रिगेड के मुख्यालय में निर्माण कार्य के लिए कुछ पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई। वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 60 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने इस मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। दरअसल, ताजमहल के आसपास लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) कहा जाता है, जहां पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पेड़ काटने पर सख्त नियंत्रण रखा गया है। मिलिट्री स्टेशन में पहले चरण में बैरक, बैगेज रूम, डाइनिंग हॉल, कुक हाउस, ब्रिगेड मुख्यालय के लिए स्टोरेज, आर्मरी, जेसीओ के लिए आवास और वाहन शेड जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। इसके लिए 60 पेड़ों को हटाने की अनुमति मांगी गई थी।
हालांकि जांच के दौरान यह पाया गया कि सभी पेड़ों को काटने की आवश्यकता नहीं है। निरीक्षण में पता चला कि 16 पेड़ों को बचाया जा सकता है, इसलिए अब केवल 44 पेड़ों को काटने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कमेटी ने कठोर शर्ते भी तय की हैं। इसके अनुसार, पेड़ काटने से पहले परिसर में कम से कम 550 पौधे लगाने होंगे और उनकी पांच साल तक देखभाल करनी होगी। इसके अतिरिक्त वन विभाग की सलाह से 1,000 देसी प्रजातियों के पौधे भी लगाए जाएंगे और उनकी भी पांच वर्षों तक देखरेख की जाएगी।
ताज ट्रेपेजियम जोन अथॉरिटी यह सुनिश्चित करेगी कि कोर्ट की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन हो। अगर तय संख्या से अधिक कोई पेड़ काटा गया तो प्रति पेड़ एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस तरह यह निर्णय विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देने का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।



