जबलपुर
राष्ट्र सेविका समिति जबलपुर महानगर द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल मैदान पर मकर संक्रांति उत्सव एवं शाखा संगम का आयोजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सेविकाओं के साथ-साथ नगर के गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रही।
मुख्य वक्ता राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांताक्का जी रहीं, और विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी एवं रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट कर्नल हिमांशी सिंह रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति की प्रांत कार्यवाहिका सुमेधा पोळ ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके पश्चात सेविकाओं ने शाखा के विभिन्न कार्यक्रमों का अनुशासित एवं सुसंगठित प्रदर्शन किया।
प्रमुख संचालिका शांताक्का जी ने कहा कि शाखा व्यक्ति निर्माण की मूल इकाई है और व्यक्ति निर्माण से ही समाज तथा समाज से राष्ट्र का निर्माण होता है। एक आज्ञा पर कार्यक्रम करना अनुशासन का अभ्यास है, और यही अनुशासन जीवन को सार्थक दिशा देता है।
उन्होंने कहा कि भारत में जन्म लेना हमारा सौभाग्य है। सब अपने हैं, यह भाव शाखा के माध्यम से जीवन में उतरता है। जैसे पौधे को पानी देकर हम स्वयं पानी पीते हैं, वैसे ही समाज की चिंता करना अंततः स्वयं के कल्याण से जुड़ा है। हम सब परस्पर पूरक हैं और हमारे भीतर एकात्म भाव है, वसुधैव कुटुंबकम् की यही भावना विश्व को परिवार मानने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हो या राष्ट्र सेविका समिति, दोनों की कार्य-पद्धति का आधार शाखा है। एक घंटे की शाखा में योग, गण-समता, खेल, गीत और छोटे-छोटे कृत्यों के माध्यम से व्यक्तित्व के श्रेष्ठ गुण विकसित होते हैं और जीवन की दिशा निश्चित होती है। नियमितता से किए गए कार्यों का प्रतिफल अवश्य मिलता है, यह संदेश शाखा निरंतर देती है। शाखा में अनुशासन के साथ यह भी सिखाया जाता है कि जीवन को सार्थक कैसे बनाया जाए। समाज, परिवार और राष्ट्र तीनों में अनुशासित जीवन के कारण ही राष्ट्र का विकास सही दिशा में होता है। बौद्धिक सत्रों में धर्म, संस्कृति, हिन्दू धर्म, संस्कृति और हिन्दुत्व जैसे विषयों पर विचार-विमर्श से भारत के महत्व की गहन समझ विकसित होती है।
कुटुंब समाज और राष्ट्र का केंद्र बिंदु है। शांताक्का जी ने भारत माता के चरणों में प्रणाम अर्पित करते हुए सभी से नियमित रूप से शाखा में सहभागी बनने का आग्रह किया और व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दृढ़ करने का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट कर्नल हिमांशी सिंह ने राष्ट्र निर्माण, संस्कृति संरक्षण और कर्तव्यबोध पर विचार रखे। उन्होंने उपस्थित वंदनीय संत समाज और गणमान्य नागरिकों को सादर प्रणाम करते हुए राष्ट्र सेविका समिति एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आरएसएस केवल एक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की पवित्र यज्ञशाला है। अपने सैन्य जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश सेवा और परिवार का दायित्व दोनों को संतुलन के साथ निभाया जा सकता है। यदि हम शत्रु को आँखों में आँखें डालकर सामना कर सकते हैं, तो परिवार की जिम्मेदारी भी उतनी ही सजगता से निभा सकते हैं। यही संतुलन जीवन को प्रेरणादायक बनाता है।
सनातन संस्कृति की व्याख्या करते हुए कहा कि सनातन वह विज्ञान है जो पूरे ब्रह्मांड को परिवार मानता है। जब-जब विश्व में अंधकार बढ़ा है, तब-तब भारत ने ज्ञान और संस्कृति के सूर्य के रूप में मार्गदर्शन किया है। यदि हम अपनी जड़ों—भाषा, शिक्षा, संस्कार, और संस्कृति—से कट गए, तो समाज कमजोर हो जाएगा। विशाल वृक्ष भी जड़ कटने पर टिक नहीं पाता।
उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्र के लिए उत्कृष्ट कार्य करें- इंजीनियर ऐसा निर्माण करें जिस पर राष्ट्र को गर्व हो, डॉक्टर सेवा-धर्म को जीवनदायक बनाएं, और तकनीक से जुड़े लोग देशहित में नवाचार करें। सशक्त समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव होता है।
उन्होंने संकल्प दिलाया कि हमारे हर कार्य, हर श्वास और हर स्वप्न में भारत प्रथम होगा। उन्होंने भारत माता की जयघोष के साथ उपस्थित जनसमूह से राष्ट्र के प्रति समर्पण का आह्वान किया।



