मेरठ, उत्तर प्रदेश
आज के समय में कोई भी व्यक्ति घर या दुकान के सामने गाड़ी खड़ी कर चला जाता है। ऐसे में वाहन मालिक को खोजने के लिए लोगों को इधर-उधर पूछना पड़ता है। कई बार बात तनाव तक पहुंच जाती है। वहीं दूसरी ओर, सड़क दुर्घटना में अगर कार चालक अकेला हो और बेहोश हो जाए, तो उसके परिवार को सूचना देना मुश्किल हो जाता है, खासकर तब जब मोबाइल फोन लॉक हो।
इसलिए इन समस्याओं का समाधान लेकर आए हैं स्पर्श और तुषार, जिन्होंने ‘कवच क्यूआर’ नाम से एक क्यूआर कोड तैयार किया है। इस क्यूआर कोड को वाहन के बाहर लगाया जाता है। किसी भी आपात स्थिति में इसे मोबाइल से स्कैन किया जा सकता है.. बता दें क्यूआर कोड स्कैन करते ही वाहन मालिक का नाम और आपातकालीन संपर्क व्यक्ति की जानकारी सामने आ जाती है। खास बात यह है कि दोनों पक्षों के मोबाइल नंबर एक-दूसरे को दिखाई नहीं देते। कॉल एक सुरक्षित सॉफ्टवेयर के माध्यम से जुड़ती है, जिससे पूरी जानकारी गोपनीय बनी रहती है। इन युवाओं ने करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद इस तकनीक को बाजार में उतारा है। अब तक उनके 4,800 से अधिक क्यूआर कोड बिक चुके हैं। स्पर्श अग्रवाल ने बताया कि उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से अनुदान मिला है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत उन्हें ऋण भी प्राप्त हुआ.. यह पहल न केवल तकनीक का बेहतरीन उपयोग है, बल्कि समाज की समस्याओं का सरल और सुरक्षित समाधान भी है।



