अयोध्या, उत्तर प्रदेश
भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या
स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि जयंती श्रद्धा और उल्लास
के साथ मनाई गई। जी हां, मंदिर परिसर के सप्त मण्डप में पहली बार आयोजित इस
कार्यक्रम में संतों और श्रद्धालुओं ने महर्षि वाल्मीकि को नमन कर उनके आदर्शों को
स्मरण किया। इस आयोजन ने भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और रामायण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का
संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा का अभिषेक किया गया। इसके बाद शास्त्रोक्त विधि से पूजन-अर्चन और आरती संपन्न हुई। ट्रस्ट की ट्रस्टी डॉ. निर्मला यादव की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में वाल्मीकि समाज के संतों सहित करीब 200 लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महंत मिथिलेश
नंदिनी शरण ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा
कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना कर भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र को समाज
के सामने प्रस्तुत किया। रामायण भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मर्यादित जीवन का
महत्वपूर्ण मार्गदर्शक ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के
आदर्शों को केवल पढ़ना या सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने आचरण और व्यवहार में
अपनाना भी आवश्यक है। महर्षि वाल्मीकि का जीवन प्रेरणा देता है कि ज्ञान, साधना और सत्कर्म के माध्यम से व्यक्ति
समाज को सकारात्मक दिशा दे सकता है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता की भावना को मजबूत किया। महर्षि वाल्मीकि के योगदान का स्मरण करते हुए उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं ने उनके विचारों तथा रामायण के संदेश को समाज में आगे बढ़ाने की प्रेरणा प्राप्त की। इस अवसर पर राम मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, महंत जयरामदास, महंत डॉ. सत्येंद्र दास वेदांती, महंत अंजनी शरण सहित अनेक संत और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



