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मीडिया विमर्श और जिम्मेदार नागरिक

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मीडिया विमर्श और जिम्मेदार नागरिक 

भारत में मीडिया को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप देखा जाता है, जहां उसकी जिम्मेदारी खबरों के आदान प्रदान तक मात्र सीमित नहीं हैं अपितु सामाजिक दायित्वों को लेकर भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि भारत एक प्रगतिशील देश है जहां लोग सामाजिक व आर्थिक रूप से संघर्षरत है। देश की बड़ी आबादी आज भी गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन यापन कर रही है। देश महंगाई, प्रदूषण, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे अनेकों समस्याओं से आज भी उबर नहीं पाया है। आज डिजिटल युग में भी देश में साइबर क्राइम और डिजिटल करप्शन एक बड़ी समस्या बना हुआ है। ऐसी स्थिति में देश की मीडिया के साथ, नागरिकों का कर्त्तव्य भी महत्वपूर्ण हो जाता है। समाज के प्रति उसे और अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है, तभी हम चौमुखी विकास की दर को तीव्र गति से बढ़ा पाएंगे एवं राष्ट्र को सशक्त एवं समृद्ध बनाने में सफल हो पाएंगे। 

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नागरिक कर्त्तव्यों का अवलोकन करना भी आवश्यक है, क्योंकि इस देश के विकास में भारतवासियों को अन्य देशों की अपेक्षा अधिक स्वायत्त प्राप्त है। भारत के संविधान में आर्टिकल 19 (1) (a) के तहत भारत के प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वंत्रता प्रदान की गई है जिसके द्वारा भारतवासियों को सूचना के आदान प्रदान का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। वो ना केवल सूचना प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं बल्कि स्वयं सूचना आदान-प्रदान करने के लिए भी उतने ही स्वतंत्र हैं। ऐसी स्थिति में जहां मीडिया व आम जनमानस के पास बराबरी का अधिकार प्राप्त है, वहां नागरिक कर्त्तव्यों के महत्व का अवलोकन करना अति आवश्यक है।

पिछले कई दशकों में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं जहां आम लोगों ने अपने निजी पहल से बड़े सामाजिक बदलाव लाने के प्रयास किये हैं । देश के सर्वाेच्च नागरिक सम्मान की सूची को अगर टटोला जाये तो हमें कई ऐसे नाम मिलेंगे जो ना केवल छोटे स्तर पर अपितु राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव लाने में सफल हुए हैं। मीडिया के माध्यम से हमें अक्सर कई ऐसे उदाहरण देखने और सुनने को मिलते हैं। लेकिन अगर उनका आंकलन किया जाय तो ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है। ऐसी स्थिति में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वह लोगों में समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के लिए उन्हें सचेत करने और सलाह देने की क्षमता रखता है। मीडिया अपने सामाजिक दायित्वों का पालन करते हुए समाज को जागरूक करता है और साथ ही अहसास दिलाता है कि देश की समस्याएं कितनी गंभीर हैं और इसे हल करना कितना आवश्यक है। यह बिना नागरिक सहयोग के असंभव है।  

इंटरनेट के बढ़ते वैश्विक विस्तार और मीडिया के माध्यम से आज के डिजिटल युग में कई ऐसे प्लेटफार्म मौजूद कराए जाते है जहां आम लोगों को अपने विचारों को समाज के सामने व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होता है। देश के कई ऐसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के माध्यम से ऐसी कई मुहिम चलायी जा रही हैं जहां आम लोगों के सफल प्रयासों के माध्यम से समाज में जागरूकता लाई जा रही है। दैनिक जागरण समाचारपत्र की अनोखी मुहिम ‘सात सरोकार’ के तहत कई ऐसी कई खबरों को प्रकाश में लाया गया जहां सात अलग विषयों में सामाजिक पहल को दर्शाया गया। यह मुहिम सुशिक्षित समाज, नारी सशक्तिकरण, गरीबी उन्मूलन, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्वस्थ समाज और जनसंख्या नियोजन जैसे विषयों पर केंद्रित थे तथा इन विषयों पर आधारित नागरिक प्रयासों को अनेकों कहानियों के माध्यम से दर्शाया गया। इसी प्रकार आम लोगों में स्व के भाव को मजबूत करने के उद्देश्य से अमर उजाला अखबार ने भी एक अनोखी मुहिम शुरू की जिसका नाम था ‘मंजिले और भी है’। इस मुहिम के तहत ऐसी कहानियों को समाज के समकक्ष लाया जाता था जो कि आम लोगो की अनदेखी पहल हुआ करती थीं। ऐसी पहलें जो बड़े बदलाव का सूचक बनीं। साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ ने एक दशक तक अपनी पहल ‘द ट्रेंडसेटर’ के माध्यम से समाज के ऐसे नायकों को प्रकाश में लाने का प्रयास किया जिन्होंने अपने निजी प्रयासों से समाज में अलग पहचान बनाई। ऐसे नायक जिन्होंने सामाजिक बदलाव के लिए अपना सब कुछ समर्पित किया और अपने प्रयासों में कामयाब भी हुए। इसी प्रकार पब्लिक ब्रॉडकास्ट दूरदर्शन एवं संसद टीवी आज भी अपने कई ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक बदलाव में लोगों की भागीदारी को दर्शाते है जोकि बहुत प्रेरणादायी होते है। कोविड महामारी के दौरान मीडिया आउटलेट्स ने नागरिकों के अद्भुत और सराहनीय प्रयासों पर अपनी पूर्ण प्रस्तुति दिखाई ताकि आम जनमानस नकारात्मक खबरों के भय से उबर सके। खबरों में सकारात्मकता को बनाये रखने के लिए दैनिक भास्कर समाचारपत्र की अनोखी पहल ‘नो नेगेटिव मंडे’ (No Negative Monday) द्वारा केवल सकारात्मक खबरों को अखबार के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित किया जाता था। देश के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल आजतक ने ‘गुड न्यूज टुडे’ (GNT) नामक एक सिस्टर चैनल की शुरुआत की ताकि सकारात्मकता को अधिक अधिकांश मात्रा में समाज में प्रसारित  और प्रचारित किया जा सके। नागरिक कर्त्तव्यों को दर्शाते मीडिया के ये अनोखे प्रयास अधिक सराहनीय साबित हुए जिससे ना केवल जागरूकता लाना संभव हो पाया बल्कि समाज को एक नई दिशा भी प्राप्त हो रही है। 

इस प्रकार मीडिया के माध्यम से जिम्मेदार नागरिकों के अनोखे प्रयासों से समाज न केवल जागरूकता की ओर अग्रसर हो रहा है बल्कि आम लोगो को भी एक नई दिशा मिल रही है। देश के प्रत्येक नागरिक को अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए देश की उन्नति में अपना सशक्त योगदान देना चाहिए साथ ही मीडिया के साथ भागीदारी करके संवाद और विमर्श के माध्यम से समाज को जागरूक करने में भी अपना प्रबल योगदान देना चाहिए ताकि सही और गलत को निष्पक्षता के साथ आंकलन कर देश को उन्नति की ओर अग्रसर किया जा सके।