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गोबर से कमाल, दीपाली चौहान ने 50 हजार से खड़ा किया लाखों का स्टार्टअप

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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की मिट्टी से एक ऐसी कहानी निकलकर सामने आई है, जो आज के युवाओं—खासकर लड़कियों—के लिए जबरदस्त इंस्पिरेशन है। ये कहानी है दीपाली चौहान की, जिन्होंने मुश्किल हालात को मौके में बदला और एक छोटा सा आइडिया आज लाखों के बिजनेस में बदल दिया।

लॉकडाउन में आया आइडिया, बन गया बिजनेस

जब देश में लॉकडाउन लगा था, लोग परेशान थे। लेकिन दीपाली ने हार मानने के बजाय कुछ नया करने का ठाना। परिवार की जिम्मेदारी और पति की खराब तबीयत के बीच उन्होंने खुद का काम शुरू करने का फैसला लिया।

साल 2019 में उन्होंने अपने खेत से ही शुरुआत की। दीपाली ने गोबर इकट्ठा किया और वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना शुरू कर दिया। शुरुआत जरूर छोटी थी, लेकिन सोच और उड़ान बहुत बड़ी।

50 हजार से शुरू, अब लाखों की कमाई

शुरुआत में उन्होंने लगभग 50,000 रुपये का निवेश किए। केंचुए खरीदे और गोबर में डालकर ऑर्गेनिक खाद बनानी शुरू की। धीरे-धीरे उनका प्रोडक्ट लोगों तक पहुंचा और डिमांड बढ़ती गई।

आज हालत ये है कि उन्हें 10 लाख रुपए से अधिक का फायदा हो रहा है... ऑर्डर इतने मिल रहे हैं कि सप्लाई कम पड़ जा रही है। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखण्ड से भी दीपाली के द्वारा तैयार वर्मी कंपोस्ट खाद की मांग हो रही है।

11 महिलाओं का ग्रुप, हर महीने कमाई

दीपाली का काम बढ़ा, तो उन्होंने अपने साथ और महिलाओं को भी जोड़ा। आज उनके समूह में 11 महिलाएं काम कर रही हैं, और प्रत्येक महिला 10 हजार से 12 हजार रुपये प्रत्येक महीने कमा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

नारी और युवा शक्ति के लिए सीख

दीपाली की कहानी एक साफ संदेश है, जो स्टार्टअप करने के लिए सोच रहे हैं कि स्टार्ट करने के लिए बड़े पैसे नहीं, बड़ा सोच चाहिए।

अगर आपके पास भी एक छोटा सा आइडिया है, सीखने की इच्छा और मेहनत करने का हौंसला है तो आप भी भर सकते हैं ऊंची उड़ान। और शुरू कर सकते हैं स्टार्टअप से बड़े बिजनेस टाइकून बनने की यात्रा।

आज के समय में जहां युवा स्टार्टअप और इनोवेशन की बात करते हैं, वहीं दीपाली चौहान ने साबित कर दिया कि “रियल स्टार्टअप” मात्र तकनीक में नहीं, खेती और गांव में भी बनते हैं।