गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
जिसे दुनिया कबाड़ समझती है, उसी से करोड़ों का कारोबार खड़ा किया है गाजियाबाद की साक्षी झा ने। यह मात्र बिजनेस नहीं, बल्कि वेस्ट टू वंडर की सोच है। जहां कचरा से होती है कमाई। साल 2008 में बिहार से पढ़ाई के लिए गाजियाबाद आईं साक्षी झा। इवेंट मैनेजमेंट के दौरान प्लास्टिक वेस्ट देखकर उनके मन में सवाल उठा, क्या कचरा भी काम आ सकता है? 50 हजार रुपये से सफर की शुरुआत करने वाला सर्फाज साक्षी इनोवेशन आज करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। साक्षी के इस इनोवेशन सेंटर में प्लास्टिस से स्कूल बेंच, कुर्सी, गार्डन बेंच तैयार किए जाते हैं। पेपर वेस्ट से सजावटी सामान।कपड़ों के कचरे से डॉल और टाइल्स बनाए जाते हैं।
इतना ही नहीं साक्षी ने कचरे से दुनिया का सबसे बड़ा चरखे का निर्माण किया है, साथ ही सबसे बड़ा कीबोर्ड और लूडो बनाने का रिकॉर्ड भी इन्ही के नाम है। साक्षी का लक्ष्य अब वेस्ट से दुनिया का सबसे बड़ा चेस बोर्ड बनाना है। 200 किलो प्लास्टिक वेस्ट से 380 किलो वजनी स्वच्छ भारत मिशन का लोगो भी तैयार कर चुकी है।
साक्षी न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी है। बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की 20 से अधिक महिलाओं को रोजगार भी दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वेस्ट टू बेस्ट के लिए साक्षी को सम्मानित कर चुके हैं। इंडिया और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी नाम साक्षी झा बन चुकी हैं पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण की पहचान।अगर सपनों को मात्र देखने का ही नहीं, उन्हें जीने का हौसला हो तो कबाड़ से भी इतिहास रचा जा सकता है।



