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ताकि हर कमजोर महिला को मिले सम्मान

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ताकि हर कमजोर महिला को मिले सम्मान 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में हमेशा मातृ शक्ति रही है। उनके हित में कई योजनाएं चल रही हैं। यहां पर दो योजनाओं की चर्चा करेंगे।  

एक - जिस जीवनसाथी के साथ सात फेरे लेते वक्त सात जन्मों तक साथ रहने का वादा किया था, कई बार उसका साथ बीच में ही छूट जाता है। पति के निधन के बाद अक्सर पत्नी को तमाम मुसीबतें घेर लेती हैं। तमाम तरह की परेशानियां सामने आ खड़ी होती हैं। ऐसी ही मुसीबत में साथ देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ‘निराश्रित महिला पेंशन योजना’ (विधवा पेंशन) चलाती है। इस योजना के तहत यूपी सरकार की ओर से 1000 रुपये महीने के हिसाब से विधवा पेंशन दी जाती है। पेंशन की राशि लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है। यदि तीन महीने की राशि एक साथ जारी की जाती है, तो यह 3000 की किस्त के रूप में खाते में आ जाती है। इस योजना का उद्देश्य पति की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट से जूझ रही महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है ताकि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर सकें और किसी पर पूरी तरह निर्भर न रहें। वर्तमान में 26 लाख से ज्यादा विधवाएं इस योजना के तहत पेंशन पा रही हैं और समाज में सिर उठाकर जीवन यापन कर रही हैं।

 राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अप्रैल 2026 से निराश्रित महिलाओं की वर्तमान पेंशन राशि 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये मासिक की जाएगी। इस तरह बीते नौ वर्षों में सामाजिक सुरक्षा की पेंशन राशि में पांच गुने की बढ़ोतरी की गई है। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत 380 करोड़ 15 लाख 74 हजार रुपये की धनराशि की व्यवस्था की है। यह धनराशि प्रदेश की निराश्रित एवं विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहारा प्रदान करने में सहायक होगी।  

दो - गरीब व वंचित वर्ग के परिवार की लड़कियों की शादी सम्मानजनक तरीके से हो और उसके लिए परिवार को परेशान भी न होना पड़े, इसलिए यूपी सरकार ने 2017 में श्मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनाश् की शुरुआत की। पिछले नौ वर्षों में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत 5 लाख 20 हजार से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न हो चुका है। यह योजना गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के लिये है। विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं के विवाह की भी इस योजना में व्यवस्था की गई है। 

 योजना के तहत प्रति जोड़ा कुल एक लाख रुपये का खर्च निर्धारित है। इसमें 60 हजार रुपये कन्या के खाते में दिए जाएंगे। इसके अलावा 15 हजार रुपये की सामग्री वैवाहिक उपहार के रूप में दी जाएगी। जबकि भोजन, पंडाल, फर्नीचर, पेयजल, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था जैसी व्यवस्थाओं पर 15 हजार रुपये प्रति जोड़ा खर्च किए जाएंगे। पायल-बिछिया से लेकर सीलिंग फैन और बिस्तर तक दिये जाने का प्रावधान है। नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। 

इसमें साड़ी, कपड़े, चांदी की पायल और बिछिया, डिनर सेट, कुकर, कढ़ाही, ट्रॉली बैग, वैनिटी किट, सीलिंग फैन, आयरन प्रेस, कूल केज, कंबल, गद्दा, तकिया और बेडशीट समेत अन्य सामग्री शामिल रहते हैं। इसमें तीन लाख सालाना आय वाले परिवार ही पात्र होंगे। योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं है। शादी की तारीख पर कन्या की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और वर की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। विधवा, परित्यक्ता तथा कानूनी रूप से तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह को भी योजना में शामिल किया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को जाति प्रमाण पत्र देना होगा। निराश्रित कन्या, विधवा महिला की पुत्री, दिव्यांग अभिभावक की पुत्री तथा स्वयं दिव्यांग कन्या को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना जैसे प्रयास समाज के जरूरतमंद परिवारों के लिए वास्तव में सराहनीय हैं। आर्थिक सहायता के साथ सम्मान पूर्वक विवाह की व्यवस्था करना कई परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होता है। ऐसी योजनाएं सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके साथ ही यह योजना नेवविवाहित बेटियों को पूरे सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत करने का बेहतरीन अवसर प्रदान कर रही है।

आंकड़ों से पता चलता है कि यह योजना पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों के लिए विशेष रूप से प्रभावी रही है। अब तक दलित समुदाय को सबसे अधिक लाभ मिला है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आदर्शों को समर्पित यह योजना ने केवल दलितों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान में सहायक है, बल्कि उन्हें गरिमापूर्ण और आत्मसम्मानित जीवन भी प्रदान कर रही है।