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कान्हा उपवन गौशाला की अनूठी पहल: : गोबर के दीपक से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

दीपावली का पर्व रोशनी, खुशियों और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस बार उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला ने दीपावली को खास बनाने के लिए एक सराहनीय पहल की है। जी हां, नगर निगम द्वारा संचालित इस गौशाला में गाय के गोबर से ऐसे विशेष दीपक तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें तुलसी के बीज भी मिलाए जा रहे हैं। इन दीपकों की खासियत यह है कि उपयोग के बाद इन्हें गमलों या क्यारियों में डालने पर ये खाद के रूप में काम आ सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में इनमें मौजूद तुलसी के बीज से पौधा भी उग सकता है।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पादों और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करती है। गोबर और गोमूत्र जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके उपयोगी उत्पाद तैयार करना न केवल गौशाला की आय बढ़ाने का माध्यम बन सकता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी प्रोत्साहित करता है। प्लास्टिक और अन्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले विकल्पों के स्थान पर ऐसे प्राकृतिक उत्पादों को अपनाना एक बेहतर दिशा में कदम है।

बता दें, गौशाला में दो लाख से अधिक दीपक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इनकी कीमत छोटे दीपक के लिए 2 रुपये और बड़े दीपक के लिए 3 रुपये निर्धारित की गई है। इनकी मांग देश के विभिन्न राज्यों से आ रही है। यह पहल दिखाती है कि पारंपरिक भारतीय ज्ञान, आधुनिक सोच और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को साथ लेकर चला जाए, तो स्थानीय संसाधनों से भी उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

सहारनपुर की यह पहल गौसेवा, स्वावलंबन और प्रकृति के संरक्षण का अद्भुत उदाहरण है। ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहन देकर हम त्योहारों को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे सकते हैं।