लखनऊ,
उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधों पर रोक
लगाने, वैज्ञानिक जांच को
मजबूत करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आधुनिक तकनीक का प्रयोग जनहित, न्याय व्यवस्था और युवाओं के बेहतर
भविष्य के लिए किया जाना चाहिए। इसके लिए साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रशिक्षित
विशेषज्ञों को बढ़ावा देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि वह लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित ‘टेकसंगम 2026’ में प्रतिभाग करेंगे। इस कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम तकनीक और डेटा सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इस आयोजन का उद्देश्य नई तकनीकों को नागरिकों की सुरक्षा, बेहतर न्याय व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं पर लोगों के भरोसे से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो साइबर
थाने और चार फॉरेंसिक लैब थीं। उस समय वैज्ञानिक जांच के पर्याप्त संसाधन नहीं
होने के कारण अपराधों की जांच में मुश्किलें आती थीं। उन्होंने उस समय प्रदेश की
कन्विक्शन रेट यानी दोषसिद्धि दर 30 प्रतिशत से कम होने की बात भी कही।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद साइबर अपराधों से निपटने और
वैज्ञानिक जांच की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठाए गए। अब प्रदेश के सभी 75
जिलों में साइबर थाने स्थापित हैं। इसके
साथ ही हर मंडल में फॉरेंसिक लैब स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इन व्यवस्थाओं से साइबर अपराधों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण को मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही सीएम योगी ने कहा कि साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में युवाओं के लिए शिक्षा, शोध और रोजगार की नई संभावनाएं बन रही हैं। इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करके युवा अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं।
आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल न केवल अपराधों की जांच को बेहतर बना सकता है, बल्कि न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में भी मदद कर सकता है। टेकसंगम 2026 में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है। इस मंच पर साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता और नई तकनीकों के जिम्मेदार इस्तेमाल पर चर्चा होगी। साथ ही, शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस तरह
के आयोजन भारत को उभरती तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और नागरिकों के
जीवन को अधिक सुरक्षित व सुविधाजनक बनाने में योगदान देंगे। यह पहल आत्मनिर्भर
भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है।



