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यूपी का यह गांव खुद बनाता है बिजली

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रामपुर, उत्तर प्रदेश

अगर गोबर से बिजली, गैस और कमाई तीनों मिलने लगें, तो आप क्या कहेंगे? यह कोई सपना नहीं यह है रामपुर की किरा ग्राम पंचायत,  जहां आत्मनिर्भरता जमीन पर उतर चुकी है! यहां संरक्षण में हैं करीब 800 गायें  जिनसे रोज मिलता है 4 हजार किलो गोबर। पहले यही गोबर था सबसे बड़ी समस्या। फिर आया एक आइडिया— क्यों न गोबर से ही ऊर्जा बनाई जाए? स्वच्छ भारत मिशन के तहत 40 लाख रुपए की लागत से लगा 85 घन मीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट। अब रोज उसी बेकार 2200 किलो गोबर से बनती है 51 किलो बायोगैस! और इसी गैस से चलता है— पानी का पंप, चारा काटने की मशीन और 24 केयरटेकरों का खाना। पूरी गौशाला की लाइट भी अब गोबर से जगमग करती है इतना ही नहीं इसी ऊर्जा से चल रही है कोल्ड प्रेस ऑयल मशीन! जिससे हर घंटे एक क्विंटल सरसों से निकलता है 30 से 35 लीटर शुद्ध तेल - सीधा किसानों के लिए!

अब तक 

-4 लाख रुपए की बिजली तैयार

-53 हजार की अतिरिक्त आय

- बाहरी बिजली पर निर्भरता लगभग खत्म!

इतना ही नहीं बिजली उत्पादन, बिजली बिल की टेंशन खत्म के साथ-साथ आमदनी का नया माध्यम बनने के साथ-साथ प्लांट से निकला गोबर का अवशेष जैविक खाद बन प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा है। तो है न कमाल का आइडिया।  अब तक मुसीबत बने गोबर से न बिजली को लेकर आत्मनिर्भर बनाया है। रोजगार मिला, तकनीकी ट्रेनिंग मिली और गांव बना आत्मनिर्भर। राज्य स्तर पर भी मिली सराहना  इसे कहा गया ‘सशक्त पंचायत, आत्मनिर्भर गांव’ का मॉडल। किरा ग्राम पंचायत ने साबित कर दिया— सही सोच, तकनीक और साथ हो तो गांव भी देश की ताकत बन सकता है!