अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
जब समूह में महिलाओं की संख्या 10 हो गई, तो श्री राघव ग्रामीण महिला आजीविका स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया। आज इस समूह से कई महिलाओं को सीधे रोजगार मिल रहा है, समूह से जुड़ी हर महिला प्रतिमाह लगभग सात से आठ हजार रुपये की कमाई कर रही है। बता दें शुरुआत में सुजाता ने रूई की सफेद बत्तियां बनानी शुरू कीं। मांग बढ़ने पर रंगीन बत्तियों का निर्माण किया गया और फिर ऑनलाइन बिक्री की शुरुआत हुई। अपने उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए सुजाता ने ट्रेडमार्क पंजीकरण कराया और अपने ब्रांड का नाम ‘श्री शुभांग’ रखा।
इसके बाद समूह ने धूपबत्ती, धूप स्टिक और धूप कोन का उत्पादन भी शुरू कर दिया। आज ‘श्री शुभांग’ ब्रांड अपनी अच्छी गुणवत्ता और खुशबू के कारण खास पहचान बना चुका है। इनके उत्पाद अब जिले की सीमाओं से बाहर निकलकर देश के कई हिस्सों तक पहुंच रहे हैं। सरकारी कैंटीन, मंदिर, बड़े ग्रोसरी स्टोर और हरियाणा की प्रसिद्ध दुकानों में भी इनकी मांग है। स्थानीय दुकानदारों को भी इससे नियमित लाभ हो रहा है। वही सुजाता राघव का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तभी परिवार और समाज मजबूत बनता है।



