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गांव की मिट्टी से जुड़ा विकास मॉडल - मेरठ की महिला प्रधान ने बनाया ईको रिसोर्ट

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गांव की मिट्टी से जुड़ा विकास मॉडल - मेरठ की महिला प्रधान ने बनाया ईको रिसोर्ट 

गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अब नई और रचनात्मक पहलें सामने आने लगी हैं। ग्रामीण विकास केवल सड़क, बिजली और पानी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि अब पंचायतें रोजगार, पर्यटन, स्वच्छता और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी ध्यान दे रही हैं। 


मेरठ के परीक्षितगढ़ ब्लॉक स्थित सिकंदरपुर गांव में महिला ग्राम प्रधान सुषमा के प्रयासों ने ग्रामीण विकास की नई मिसाल पेश की है। गंगा किनारे बसे इस गांव में पंचायत की जमीन पर तैयार किया गया ईको रिसोर्ट आज आत्मनिर्भरता, ग्रामीण पर्यटन और रोजगार का केंद्र बन गया है। गांव के करीब 1200 परिवारों के लिए यह पहल केवल एक भवन नहीं, बल्कि विकास की नई सोच का प्रतीक बन गई है।


ग्राम प्रधान सुषमा के गांव में हर वर्ष दुर्गा अष्टमी मेले और गंगा स्नान के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इसी समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत मिली 20 लाख रुपये की राशि से ईको रिसोर्ट का निर्माण कराया गया। रिसोर्ट में तीन वातानुकूलित कमरे, कैंटीन, पार्क, बच्चों के झूले और घूमने के लिए ट्रैक जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं और परिसर में जैविक खेती के लिए भी जगह छोड़ी गई है। 


रिसोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका देशी खान-पान होगा। यहां आने वाले मेहमानों को गुड़ की चाय, सरसों का साग, कढ़ी-चावल तथा ज्वार, बाजरा, मक्का और रागी की रोटियों का स्वाद मिलेगा। मिट्टी की हांडी में तैयार भोजन गांव की पारंपरिक संस्कृति से जोड़ने का काम करेगा।


रिसोर्ट संचालन में स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है और दिन में महिला समूह भोजन और व्यवस्था संभालेंगे, जबकि रात में पुरुष कर्मचारी तैनात रहेंगे। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा।


सिकंदरपुर गांव स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी मिसाल बना है। गांव में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया गया है, जहां गीले और सूखे कूड़े को अलग कर विद्युत उत्पादन प्लांट को बेचा जाता है, जिससे ग्राम पंचायत को सालाना करीब 50 हजार रुपये की आय हो जाती है।  


ग्राम प्रधान सुषमा का कहना है कि रिसोर्ट से होने वाली आय गांव के विकास कार्यों में खर्च की जाएगी। साथ ही गांव की बेटियों के जन्म उत्सव और विवाह समारोह के लिए रिसोर्ट नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। 


इस सराहनीय प्रयास ने पंचायत की आय बढ़ाने और ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ईको रिसोर्ट का निर्माण कर गांव को विकास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान दिलाई है...