आगरा,उत्तर प्रदेश
पर्यावरण को स्वच्छ और
सुरक्षित रखने के लिए छोटी-छोटी पहल भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं। इसी सोच के साथ
आगरा नगर निगम ने स्वच्छता अभियान को महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार से जोड़ने की
सराहनीय पहल की है। ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत नगर निगम से जुड़े स्वयं
सहायता समूहों की महिलाएं कपड़े के सुंदर, मजबूत और उपयोगी
थैले तैयार कर रही हैं। इस पहल से जहां प्लास्टिक के उपयोग को कम करने में मदद मिल
रही है, वहीं महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल रहा है।
प्लास्टिक का विकल्प बन रहे कपड़े के थैले
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प के
अनुरूप यह पहल पर्यावरण संरक्षण और महिला स्वावलंबन, दोनों को बढ़ावा
दे रही है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं सिलाई के माध्यम से कपड़े के थैले
तैयार कर रही हैं। इन थैलों का प्रयोग बाजार में खरीदारी के दौरान किया जा सकता
है। इससे प्रतिबंधित पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने में मदद
मिलेगी। साथ ही महिलाओं को अपने हुनर के माध्यम से आय अर्जित करने का अवसर भी मिल
रहा है।
5आर के सिद्धांतों से स्वच्छता का संदेश
बता दें, अभियान के तहत नागरिकों को स्वच्छता के
प्रति जागरूक करने के साथ ही जीवन में 5आर के सिद्धांत
अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया
कि इन सिद्धांतों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने का
संदेश दिया जा रहा है।
5आर में अनावश्यक वस्तुओं को लेने से इनकार करना, जरूरत
के अनुसार वस्तुओं का प्रयोग करना, चीजों का दोबारा
उपयोग करना, पुरानी वस्तुओं को नए काम में लाना और कचरे का पुनर्चक्रण करना शामिल
है। इन आदतों को अपनाकर कचरे की मात्रा कम की जा सकती है और प्राकृतिक संसाधनों को
बचाने में मदद मिल सकती है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल शहर की सफाई करना नहीं, बल्कि
लोगों की रोजमर्रा की आदतों में सकारात्मक बदलाव लाना भी है, ताकि
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जनभागीदारी से एक जनआंदोलन बन सके।
5आर सेंटरों पर मिलेंगे किफायती थैले
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए कपड़े के थैले
नगर निगम के 5आर सेंटरों पर किफायती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नगर निगम ने
शहरवासियों और व्यापारियों से अपील की है कि वे खरीदारी के समय पॉलीथिन के बजाय
कपड़े के थैलों का प्रयोग करें।
इस पहल में नागरिकों की भागीदारी से दोहरा लाभ होगा। एक ओर प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर इन थैलों को बनाने वाली महिलाओं को रोजगार और आर्थिक सहयोग मिलेगा।



