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हमारी जिम्मेदारी है कि हम पूरे विश्व को सह-अस्तित्व का व्यावहारिक और क्रियात्मक संदेश दें – रविकुमार अय्यर जी

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पुणे

विचारक एवं विविध संस्कृतियों के अध्येता रविकुमार अय्यर जी ने कहा कि विश्वभर में मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती चुनौतियाँ, टूटती परिवार व्यवस्था और पनपते कट्टरवाद (रेडिकलाइजेशन) के कारण आज वैश्विक स्तर पर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे समय में सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण की दृष्टि रखने वाला ‘हिन्दू दर्शन’ ही विश्व को शांति और सह-अस्तित्व का सही मार्ग दिखा सकता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी द्वारा अभी हाल ही में पाश्चात्य देशों के प्रवास के दौरान वैश्विक कल्याण और सह-अस्तित्व पर रखे विचारों की पृष्ठभूमि को एरंडवणे स्थित सेवा भवन में आयोजित ‘हिन्दू संकल्पना का वैश्विक आकलन’ विषयक व्याख्यान में मुख्य वक्ता रविकुमार अय्यर जी ने अपने वक्तव्य में विस्तार से रेखांकित किया। कार्यक्रम के मंच पर ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के अखिल भारतीय टोली सदस्य रघुनंदन जी, ‘विश्व संवाद केंद्र’ के अध्यक्ष अभय कुलकर्णी जी, ‘एकता’ पत्रिका की संपादिका रूपाली भूसाड़ी एवं सुनीता प्रभुणे उपस्थित रहे।

पाश्चात्य जगत पर हिन्दू विचारों का प्रभाव

रविकुमार अय्यर जी ने कहा, “स्टीव जॉब्स से लेकर लिसा मिलर तक, पाश्चात्य जगत की अनेक महान हस्तियों को हिन्दू दर्शन ने नई दिशा और प्रेरणा दी है। ईश्वर प्राप्ति के विविध मार्ग, आध्यात्मिक उन्नति का विज्ञान और सह-अस्तित्व का विचार ही वास्तव में हिन्दू विचार है। आज सूचना तकनीक और सोशल मीडिया के युग में ज्ञान सुलभ होने से समाज अधिक तार्किक दृष्टिकोण अपना रहा है। सदैव शास्त्रार्थ, तर्क और विवेक को प्राथमिकता देने वाला हिन्दू दर्शन आज दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर लोग जाने-अनजाने हिन्दुत्व को अंगीकार कर रहे हैं। अब एक भारतीय के रूप में हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम पूरे विश्व को सह-अस्तित्व का व्यावहारिक और क्रियात्मक संदेश दें।”

विश्व-कल्याण का संदेश

अमेरिका प्रवास के दौरान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने विभिन्न मत-पंथों के विचारकों, भारतीय मूल के नागरिकों और संघ स्वयंसेवकों से संवाद साधा। उन्होंने हिन्दुत्व की मूल अवधारणा ‘सह-अस्तित्व’ और ‘विश्व-कल्याण’ पर बल दिया। मानसिक स्वास्थ्य के संकट और परिवार व्यवस्था के क्षरण जैसी वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए सभी पंथों को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे।

रविकुमार जी ने उल्लेख किया कि विदेशों में किसी भी प्राकृतिक या अन्य आपदा के समय संघ के स्वयंसेवक सबसे पहले सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। साथ ही वहां के सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भी अपना श्रेष्ठ योगदान दे रहे हैं।

कार्यक्रम में ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के रघुनंदन जी ने कहा, “स्वेच्छा से हिन्दू जीवनशैली अपनाने के लिए आवश्यक आचरण, वैचारिक दृष्टि और अनुकूल सामाजिक संरचना का पोषण करना हमारा कर्तव्य है।”

अजय महाजन जी ने कहा, “धर्म, संस्कृति और भाषा की विविधता को संघर्ष के दृष्टिकोण से न देखकर सह-अस्तित्व की भावना से देखा जाना चाहिए। हिन्दू विचार वास्तव में ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का दर्शन कराने वाली एक व्यापक वैश्विक दृष्टि है।”

कार्यक्रम का संचालन सुवर्णा धर्माधिकारी ने किया तथा आभार ज्ञापन रूपाली भूसाड़ी ने प्रस्तुत किया।