हरिद्वार, उत्तराखण्ड
कांवड़ यात्रा की
तैयारियों में लापरवाही नहीं, सीएम धामी ने दिए सख्त निर्देश
सनातन धर्म में
कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा, तप, सेवा और अनुशासन का
विराट उत्सव है। हर वर्ष लाखों शिवभक्त हरिद्वार और अन्य पवित्र तीर्थों से गंगाजल
लेकर पैदल यात्रा करते हुए अपने-अपने शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। आस्था के इस
महापर्व को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और
श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड सरकार ने व्यापक
तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जी हां, मुख्यमंत्री
पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल बनाने के लिए अधिकारियों को समय रहते सभी
आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। हरिद्वार स्थित मेला
नियंत्रण भवन सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा
कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आस्था, सेवा-भाव, प्रशासनिक क्षमता और कार्यकुशलता का प्रतीक है। हमारा लक्ष्य
“सुरक्षित कांवड़, सुव्यवस्थित कांवड़
और स्वच्छ कांवड़” होना चाहिए, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु देवभूमि उत्तराखंड से सुखद अनुभव लेकर
लौटे।
मुख्यमंत्री ने
अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ मार्ग पर पेयजल, स्वच्छ शौचालय, विश्राम स्थल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की
जाए। महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त संख्या में
स्वच्छ पिंक टॉयलेट स्थापित किए जाएं। साथ ही यात्रा के दौरान नो-प्लास्टिक अभियान
का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए और यात्रा समाप्त होने के बाद पूरे क्षेत्र की
तत्काल सफाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, व्यापारियों, संत समाज और धर्माचार्यों के सहयोग से कांवड़ मेले का संचालन और
अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। धर्माचार्यों और संतों के संदेशों पर आधारित
वीडियो तैयार कर कांवड़ यात्रियों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि यात्रा अनुशासित और मर्यादित ढंग से संपन्न हो।
आगे मुख्यमंत्री ने
सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील और अतिसंवेदनशील
क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए। पूरे मेला क्षेत्र में
सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और AI आधारित निगरानी प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया जाएगा।
कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और सोशल मीडिया
पर अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी निगरानी रखने के भी निर्देश दिए गए।
यातायात व्यवस्था
को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रियों और स्थानीय नागरिकों के लिए
अलग-अलग ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए, जिससे आमजन को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि
किसी भी परिस्थिति में वीआईपी मूवमेंट के कारण श्रद्धालुओं की यात्रा प्रभावित
नहीं होनी चाहिए।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रमुख पड़ावों और मेला क्षेत्रों में मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था रहे। प्रमुख घाटों पर वाटर एंबुलेंस तैनात की जाए और SDRF, NDRF, जल पुलिस और अग्निशमन विभाग को पूरी तरह अलर्ट रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
मुख्यमंत्री ने हर की पैड़ी, कांगड़ा पुल और अन्य प्रमुख घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन निकासी योजना तैयार रखने के निर्देश दिए। साथ ही अतिक्रमण हटाने, निर्धारित मानकों से अधिक ऊंची कांवड़ और अत्यधिक ध्वनि वाले डीजे वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण रखने को कहा। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल और हेल्प डेस्क को भी सक्रिय रखने पर विशेष जोर दिया गया।
खाद्य सुरक्षा को
लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि होटल, ढाबों और अन्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की
नियमित जांच की जाए। सभी प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस और पंजीकरण स्पष्ट रूप से
प्रदर्शित होना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई की
जाए।
उन्होंने सभी
विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि 24 घंटे
कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन सक्रिय रहें। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
प्रतिदिन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। साथ
ही आगामी महाकुंभ-2027 की तैयारियों को भी कांवड़ यात्रा के दौरान प्रभावित न होने
देने के निर्देश दिए गए।
आस्था, सेवा और सुशासन के समन्वय से उत्तराखण्ड सरकार इस वर्ष कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। लक्ष्य केवल सफल आयोजन नहीं, बल्कि प्रत्येक शिवभक्त को ऐसा अनुभव देना है कि देवभूमि उत्तराखण्ड की व्यवस्थाएं उनकी श्रद्धा और विश्वास को और अधिक मजबूत करें।



