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कम लागत, अधिक लाभ! सतावर की खेती बना किसान के लिए वरदान

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कम लागत, अधिक लाभ! सतावर की खेती बना किसान के लिए वरदान

रामपुर, उत्तर प्रदेश

आज के समय में किसान पारंपरिक खेती के साथ नई और लाभकारी फसलों की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के रामपुर के किसान गुलफाम अली इसका उदाहरण हैं।  जी हां, कभी सामान्य खेती करने वाले गुलफाम अली ने वर्ष 2017 में बाबा रामदेव से प्रेरणा लेकर औषधीय खेती शुरू की  और आज सतावर की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। वह करीब 15 एकड़ में सतावर उगा रहे हैं और दावा करते हैं कि रामपुर में इतने बड़े स्तर पर यह खेती केवल वही करते हैं।


गुलफाम अली बताते हैं कि सतावर एक औषधीय फसल है, जिसकी बाजार में हमेशा अच्छी मांग रहती है। इसकी कीमत 90 हजार से 1 लाख रुपये प्रति क्विंटल तक मिल जाती है। एक बीघा में इसकी खेती पर लगभग 35 से 40 हजार रुपये खर्च आता है, जिसमें मजदूरी, सिंचाई और फसल तैयार होने तक का पूरा खर्च शामिल होता है। अच्छी पैदावार होने पर एक बीघा से करीब 4 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है। सतावर की खेती में पहले बीज से पौधा तैयार किया जाता है, जिसमें करीब 6 महीने लगते हैं। इसके बाद मार्च से अगस्त के बीच खेत में रोपाई की जाती है और फसल तैयार होने में लगभग 18 महीने लगते हैं। 


तैयार फसल की जड़ों को उबालकर, छीलकर और सुखाकर बाजार में भेजा जाता है। उनकी फसल कई बड़ी आयुर्वेदिक कंपनियों तक पहुंचती है, जहां इसका उपयोग दवाइयों और च्यवनप्राश जैसे उत्पादों में होता है। यह कहानी बताती है कि मेहनत, नई सोच और सही दिशा में किया गया प्रयास खेती को भी सफलता और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बना सकता है।