• अनुवाद करें: |
विशेष

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सवों से भरपूर मई

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सवों से भरपूर मई 

स्कूलों में छुट्टियां हो जाती हैं। हमारा कृषि प्रधान देश है। चरी, बाजरा बोकर, बाजरा में ग्वार लगा दी जाती है। इसमें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है। इसलिए किसान के पास भी समय होता है और गर्मी भी उत्सवों की उमंग के साथ कटती है। कुछ त्यौहार तो पिछले महीने से चल रहे हैं। मई का महीना दक्षिण भारत के मंदिरों में वार्षिक ब्रह्मोत्सवम और रथ उत्सवों का समय होता है। केरल के कई मंदिरों में छोटे स्तर के ‘पूरम’ उत्सव भी इस दौरान आयोजित किए जाते हैं। 

बुद्ध पूर्णिमा (1मई) वैशाख पूर्णिमा,  सारनाथ मेला भारतीय बौद्ध सर्कट का महत्वपूर्ण स्थल होने के नाते, यहां एक विस्तृत मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी यहां आते हैं। सागा दावा सिक्किम, दार्जीलिंग पर्यटन, वैशाख पूर्णिमा को यहां का प्रवास, स्थानीय लोगों को उनके सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार को मनाते हुए देखने और इस अनूठी संस्कृति, भव्य बौद्ध गतिविधियों को भी देखने का मौका मिलता है। कई प्रदेशों के बौद्ध बहुल क्षेत्रों में भगवान बुद्ध के जन्मोत्सव के रूप में इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण का प्रतीक है और उत्तर भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। 1 महीने तक चलने वाला चिथिराई महोत्सव, 19 अप्रैल से मदुरै तमिलनाडु के प्रसिद्ध मंदिर में भगवान सुंदरेश्वर के साथ, देवी मीनाक्षी के विवाह के उपलक्ष में मनाया जाता है। इस अवसर पर व्यापार, प्रदर्शनी, मेले आयोजित किए जाते हैं। 1 मई को भगवान कल्लाझगर का वैगई नदी में प्रवेश उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण है। 2 मई को भगवान के 10 अवतारों की प्रदर्शनी तथा 3 मई को फूलों की पालकी में भगवान की विदाई यात्रा है। 

मोआत्सु उत्सव (1 से 3 मई ) यह नागालैंड की ‘आओ’ (।व) जनजाति द्वारा मई के पहले सप्ताह में फसल बुवाई के बाद मनाया जाता है। इसमें पारंपरिक गीत और नृत्य के साथ प्रकृति का आभार व्यक्त किया जाता है। वैसे यह उत्सव सप्ताह तक चलता है।  

 अंतर्राष्ट्रीय पुष्प मेला गंगटोक (1 मई से 31 मई) सिक्किम में फूलों की सुंदरता और वृक्षारोपण के ज्ञान के साथ, स्वदेशी पौधों के बारे में व्याख्यान और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। क्षेत्रीय व्यंजनों के स्वाद के साथ, याक की सवारी का आनन्द उठाया जाता है। जिन्हें रोमांच पसंद है, उनके लिए रिवर राफ्टिंग है। 

नारद जयंती (2 मई ) ऐसी मान्यता है कि नारद मुनि भगवान विष्णु के अवतार थे और सभी देवों के प्रिय थे। नारद जी तीनों लोकों में आया जाया करते थे। देवी-देवताओं और असुरों तक का संदेश पहुंचाया करते थे। हम इस दिन को पत्रकार दिवस के रूप में मनाते हैं। 

ऊटी ग्रीष्म महोत्सव ( 4 से 27 मई में तक), नीलगिरी की ताजी हवा में प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच, यह गर्मी के त्यौहार की तरह है। यहां फूलों की सजावट, सब्जियों की नक्काशी, फूलों की रंगोली, रोज शो, फ्रूट शो, डॉग शो, स्पाइस शो, वेजिटेबल शो, बोट शो का आनन्द उठा सकते हैं।  

संकष्टी चतुर्थी 5 मई - भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। 2026 में ज्येष्ठ माह में अधिकमास के कारण 19 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें कुल 8 बड़े मंगल (बुढ़वा मंगल) पड़ेंगे। यह 5 मई से शुरू होकर 23 जून तक चलेंगे। हिंदू मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। बड़ा मंगल 5,12,19,26 मई को हैं।

बुढ़वा मंगल के दिन हनुमान जी के वृद्ध रूप की पूजा की जाती है। इस दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है, जिससे मंगल दोष कम होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मंदिरों में भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। 

7 मई को रवींद्रनाथ टैगोर जयंती हैं, वहीं पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में यह उत्सव अक्सर बंगाली महीने बोइशाख के 25वें दिन, विश्वविख्यात कवि, संगीतकार, गीतकार निबंधकार और दार्शनिक रविंद्र नाथ टैगोर का जन्मदिवस मनाया जाता है। भारत का राष्ट्रगान टैगोर जी की रचना की देन है। त्रिपुरा और असम के बंगाली समुदाय के बीच कवि रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाई जाती है। 

मातृ दिवस (10 मई ) हिंदू धर्म में तो प्रत्येक दिन सुबह उठते ही मां को प्रणाम करने की परंपरा है। अब मई के दूसरे रविवार को बच्चे मां के लिए कुछ विशेष करते हैं। कैरियर के कारण घर से दूर रहना मजबूरी है। लेकिन अति व्यस्त रहने पर भी इस दिन को नहीं भूलते हैं और अपने अपने तरीके से मनाते हैं। यानि माताओं के सम्मान में मनाया जाने वाला आधुनिक उत्सव। अपरा एकादशी-13 मई) मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

ढुंगरी मेला 14 से 16 मई घटोत्कच की माँ देवी हिडिम्बा के जन्मदिन के उपलक्ष में ढंुगरी मेला लगाया जाता है। देवी हिडिम्बा का सम्मान करने के लिए क्षेत्र के सभी महत्वपूर्ण देवता आते हैं। इस उत्सव में भाग लेने के लिए स्थानीय देवताओं की रंग बिरंगी पालकियां भी मैदान में आतीं हैं। 

ग्रीष्म उत्सव माउंट आबू (14 से 16 मई) राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन पर असाधारण, दिलचस्प कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है जो जुलूस के साथ शुरू होता है। उसके बाद राजस्थान, गुजरात के लोक प्रदर्शन शुरू होते हैं। फायरफ्लाइज़ त्योहर 14 मई से 21 जून को पुरूषवाड़ी में एक जादुई आयोजन है। प्रीमानसून सीजन के दौरान महाराष्ट्र के ग्रामीण शांत इलाकों में हज़ारों जुगनु एक मनमोहक प्राकृतिक शो का निर्माण करते हैं। इस दौरान पर्यटकों के लिए तारों के नीचे कैंपिंग, गाँव की सैर और कहानी सुनाने के सत्र शामिल किए जाते हैं। शनि जयंती और वट सावित्री व्रत 16 मई - शनि देव का जन्मोत्सव और सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला व्रत, वट सावित्री  रखा जाता है। इस दिन सौभाग्यवती महिलाएँ पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और संतान की कामना करते हुए व्रत करतीं हैं। वट यानि बरगद के पेड़ के नीचे बैठ कर व्रत की कथा करतीं हैं और उसकी पूजा करतीं हैं। शनि जयंती के कारण यह दिन शनि शांति पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

गंगा दशहरा (25 मई) माना जाता है कि इसी दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। उत्तर भारत (विशेषकर ऋषिकेश, हरिद्वार और वाराणसी) में इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान, दान और जल सेवा का विशेष महत्व माना जाता है। पद्मिनी एकादशी एवं गायत्री जयंती (अधिक मास एकादशी-27 मई) अधिक मास में आने वाली एकादशी विशेष पुण्यदायी मानी जाती है। गायत्री परिवार के लिए वर्ष 2026 एक अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष है क्योंकि इसे स्वर्णिम शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान शांति कुंज, हरिद्वार और विश्व भर में कई आध्यात्मिक कार्यक्रमों और महायज्ञों की श्रृंखला आयोजित करने की योजना है।

वीर सावरकर जयंती, (28 मई ) भारत के क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, समाजसुधारक, इतिहासकार, विचारक थे। ईगितुन चालने (आग में चलना) सिरिगाओ गोवा, यह राजधानी पणजी से 30 किमी दूर, सिरिगाओ के मंदिर में मनाया जाता है। अनुष्ठान देखने के लिए आगंतुक और स्थानीय लोगों की भीड़ मंदिर के चारों ओर लग जाती है। 

ऽ ज्येष्ठ पूर्णिमा ( 30 मई ) - धार्मिक स्नान और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण तिथि है ।

ऽ सागा दावा (31मई) सिक्किम में यह पवित्र महीना मई-जून के आसपास पड़ता है। 2026 में मई के अंत तक इसके मुख्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो सकते हैं, जो बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को समर्पित हैं। येरकॉड ग्रीष्मोत्सव सलेम तमिल नाडु में मई के अंतिम सप्ताह अन्ना पार्क में फूलों की प्रदर्शनी, नाव दौड़, सांस्कृतिक आयोजन, डॉग शो, गांव के दौरे, साहासिक गतिविधियों के साथ पर्यटन का जश्न मनाया जाता है। यहां हर साल, त्योहार के दौरान आयोजनों की गतिविधियां बदल जाती हैं। इसलिए इस उत्सव में मौज मस्ती और जश्न की गारंटी मानी जाती है। 

ऐसे मेें विविधताओं के हमारे देश में महापुरूषों के जन्मदिवसों, कहीं मौसम के कारण प्रकृति की सुन्दरता और धार्मिक शुभ दिनों के कारण मेले, उत्सव होते हैं। जिससे जीवन की एकरसता दूर होती है। उस दिन क्या पारंपरिक पकवान बनेगें? लाल, पीले आदि खिले हुए रंगों की पोशाकों का उत्सवों में पहनने का ज़िक्र चलता है और उस विशेष दिन से संबंधित कथाएं सुनने को मिलती हैं। बजट के अनुसार पर्यटन की योजना बनाना और फिर तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इससे सामाजिक समरता बढ़ती है।