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सुख-साधनों को देने वाली मातृभूमि की हम सदैव करें सेवा - PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा किया है। पीएम मोदी ने संस्कृत के श्लोक के माध्यम से लोगों से मातृभूमि की सेवा करने की अपील की है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा,विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥”

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “जिसमें सभी प्रकार की श्रेष्ठ वनस्पतियां और औषधियां पैदा होती हैं, वह पृथ्वी माता विस्तृत और स्थिर हो। विद्या, शौर्य, सत्य, स्नेह आदि सद्गुणों से पालित-पोषित, कल्याणकारी और सुख-साधनों को देने वाली मातृभूमि की हम सदैव सेवा करें।”

इसके पहले बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा था, “आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। इसी से प्रेरित होकर आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।”

इसके साथ ही श्लोक भी लिखा था, आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती। तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते।”

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “स्वयं का उत्थान करना और निरंतर आगे बढ़ना ही जीवन की सच्ची नीति है। इसी ध्येय को आधार बनाकर गुणी और विद्वान लोग अपने ज्ञान, कौशल और प्रभाव का विस्तार करते हैं, ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें।”